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सरकार रक्षा खरीद सौदे की व्यवस्था बदलने को तैयार

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सरकार रक्षा खरीद सौदे की व्यवस्था बदलने के लिए तैयार है। रक्षा मंत्रालय अब सैनिक साजोसामान के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को ठेका देने के बजाय देश की निजी कंपनियों से करार करेगी।
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रक्षा साजोसामान और हथियारों की खरीद से जुड़े छह क्षेत्रों में इन कंपनियों से करार होंगे। रक्षा खरीद और अधिग्रहण को नई शक्ल देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख वी के आत्रे की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है, जो रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया अभियान के तहत कंपनियों के चयन के लिए निर्देश सुझाएगी।

इसके तहत पनड़ुब्बी, विमानों और मिसाइलों की सप्लाई और दूसरे साजो-सामान के उत्पादन और अधिग्रहण समेत छह क्षेत्रों का चयन किया जाएगा।
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सप्लाई कर चुकी कंपनी को दोबारा मौका नहीं

फिक्की की ओर से आयोजित एक सेमिनार में हिस्सा लेने के बाद रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने बताया कि सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी या सप्लायर को चुनने से गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। इस प्रक्रिया में अक्षम कंपनी के चुने जाने का खतरा रहता है।

सरकार का मानना है कि सक्षम कं पनी या सप्लायर की सप्लाई अहम है। रक्षा मंत्री ने साफ कर दिया कि एक बार सप्लाई कर चुकी कंपनी को दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई कंपनी या समूह एक सेगमेंट के लिए चुनी जाती है तो दूसरे सेगमेंट में उसे मौका नहीं मिलेगा।

इस संबंध में सरकारी कंपनी मझगांव बंदरगाह लिमिटेड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह कंपनी छह स्कॉर्पिन पनडुब्बी बना रही है। यह कंपनी 60000 करोड़ रुपये का एक और ठेका हासिल करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में साफ है कि मझगांव बंदरगाह लिमिटेड के रहते एक और निजी कंपनी को मौका दिया जा सकता है। 
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