पुराने साल में कोयला घोटाले की घटना को पीछे छोड़कर सरकार बिजली की किल्लत दूर करने के लिए कोल ब्लॉक आवंटन की प्रक्रिया फिर से शुरू करने जा रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से बिजली की समस्या के मद्देनजर जल्द से जल्द कोल आपूर्ति के निर्देश देने के बाद कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने नीलामी प्रक्रिया के तहत 17 कोयला ब्लॉक के आवंटन को मंजूरी दे दी है। सरकारी कंपनियों को दिये गए ज्यादातर कोल ब्लॉक का इस्तेमाल बिजली प्लांट के लिए किया जाएगा।
वर्ष 2012 में कोयला घोटाले के कारण सहयोगी दलों और विपक्ष के दबाव में रही यूपीए सरकार ने अब सरकारी कंपनियों को अधिक पारदर्शिता के साथ कोल ब्लॉक आवंटन शुरू करने का निर्णय लिया है। जायसवाल ने बताया कि पहले चरण में नीलामी प्रक्रिया के तहत 17 कोल ब्लॉक को केंद्र और राज्य सरकार की कंपनियों या सार्वजनिक उपक्रमों को देने का निर्णय लिया गया है। कोयला मंत्रालय इनका आवंटन संशोधित माइंस एंड मिनरल डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन एक्ट (एमएमडीआर) के प्रावधानों और नियमों के आधार पर करेगा।
आवंटित कोल ब्लॉक में से 14 कोल ब्लॉक बिजली और 3 ब्लॉक का इस्तेमाल खनन के लिए किया जाएगा। कोल ब्लॉक आवंटन के पहले चरण के लिए सरकारी कंपनियों को अपना प्रस्ताव 30 जनवरी तक पेश करना होगा। माना जा रहा है कि इन ब्लॉक में करीब साढ़े आठ अरब टन का कोल रिजर्व हो सकता है।
हाल में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में तमाम बिजली परियोजनाओं के मंजूरी और ईंधन आपूर्ति समझौते के अभाव में प्रभावित होने पर अपनी चिंता जाहिर की थी। जबकि बारहवीं पंचवर्षीय योजना में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने को प्राथमिकता से जगह भी दी है।
माना जा रहा है कि जिन कंपनियों को कोल ब्लॉक आवंटित किया जाएगा, उन्हें खनन संबंधी पूर्व सफलता का ब्यौरा सरकार को देना होगा। उन्हें यह ब्यौरा भी देना होगा कि भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण संबंधी मंजूरी जैसे जरूरी कार्य को कितने समय में पूरा किया है। जबकि पिछले पांच साल का कंपनी संबंधी वित्तीय ब्यौरा, मौजूदा स्थिति और अगले पांच साल के कारोबार का एक खाका मंत्रालय के समक्ष रखना होगा।
मालूम हो कि कैग ने नीलामी प्रक्रिया के बगैर 57 निजी कंपनियों को कोल ब्लॉक के आवंटन से 1.86 लाख करोड़ रुपए के नुकसान का आंकलन कर कोयला मंत्रालय को कटघरे में खड़ा कर दिया था।