देश को आजाद हुए 68 वर्ष हो गए हैं लेकिन कितने स्वतंत्रता सेनानी हैं, यह जानकारी केंद्र सरकार के पास नहीं है। सरकार के पास इसकी जानकारी न होने से स्वतंत्रता सेनानियों को दी जाने वाली पेंशन में भारी अनियमितता की बू दिख रही है।
अल हिंद पार्टी ने जनहित याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में ये बातें लाई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर बताया है, लेकिन शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता संगठन को हाईकोर्ट के पास जाने के लिए कहा है।
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि हाईकोर्ट इस मामले को बेहतर तरीके से देख सकता है। स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी आखिरी बार वर्ष 2009 में केंद्रीय सूचना आयोग में एक सुनवाई के दौरान सामने आई थी।
तब गृह मंत्रालय ने आयोग के समक्ष कहा था कि देश भर में करीब सात लाख स्वतंत्रता सेनानियों ने पेंशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन जांच पड़ताल के बाद महज 1.7 लाख लोगों को ही पेंशन की मंजूरी दी गई।