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'कब तक सहेंगे हमले, पाक पर नरम क्यों है सरकार'

Thu, 14 Mar 2013 08:39 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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श्रीनगर में सीआरपीएफ कैंप पर आत्मघाती हमले को लेकर विपक्ष ने सरकार से पूछा है कि भारत कब तक हमले सहता रहेगा और पाकिस्तान पर सरकार नरम क्यों है।
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संसद के दोनों सदनों में समूचे विपक्ष ने आक्रामक रवैया अपनाते हुए सवाल उठाया कि एक तरफ सरकार पाक पीएम के स्वागत में दावतों का आयोजन कर रही है तो दूसरी तरफ पाक कश्मीर में आतंकी हमलों को अंजाम दे रहा है।

शिवसेना ने तो सरकार पर चूड़ी पहनने का आरोप लगा दिया। विपक्ष के हंगामे के चलते संसद के दोनों सदनों में प्रश्नकाल नहीं चल सका।

लोकसभा और राज्यसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने श्रीनगर में आतंकी हमले पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने पूछा कि सरकार पाक पर इतनी नरम क्यों है।
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उन्होंने कहा कि मैं अजमेर शरीफ के दीवान को सलाम करती हूं, जिन्होंने पाक पीएम का स्वागत करने से इंकार कर दिया था। दीवान ने जो कर दिखाया, वह सरकार न कर सकी।

साथ ही सुषमा ने कहा कि आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को जब सदन श्रद्धांजलि दे रहा था तो सत्ता पक्ष के आगे की पंक्ति खाली थी।

सदन में अध्यक्ष शोक संदेश पढ़ रही थीं और सदन के नेता सुशील कुमार शिंदे, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद नहीं थे।

सुषमा ने अजमेर आए पाक पीएम के सम्मान में विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की ओर से भोज देने पर एतराज जताया और कहा कि पहले से खुफिया जानकारी के बावजूद सरकार आतंकियों के मंसूबों को विफल क्यों नहीं कर पाती है। ऐसा कब तक चलता रहेगा। क्या हम लोग सिर्फ जवानों को शहीद होते यूं ही देखते रहेंगे और श्रद्धांजलि देते रहेंगे।

राज्यसभा में भाजपा नेता वेंकैया नायडू ने कहा कि सरकार आतंकी हमले रोकने में विफल साबित हो रही है। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने मांग की कि पाक को जो भाषा समझ आती है उसे उसी में जवाब देना चाहिए।

माकपा के सीताराम येचुरी ने खुफिया एजेंसियों की सूचनाओं के लेन देने में खामी को सुधारने की सलाह दी तो शिव सेना नेता संजय राउत ने कहा कि अगर पाक आत्मघाती हमलावर भेजकर हमला कर सकता है तो हम भी उन पर इस तरह के हमले करने के लिए तैयार हैं।

गृह मंत्री बताएं कि उन्हें कितने आत्मघाती हमलावर चाहिए। सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि अगर आतंकवाद नहीं रोक सकती तो उसे खुद को कमजोर सरकार घोषित कर देना चाहिए।

उधर, सुरक्षा बलों के पास हथियार नहीं होने की विपक्ष की शिकायत पर शिंदे ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति प्रक्रिया जारी है। बंदूक के प्रदर्शन को कम करने के मकसद से गश्त और चौकसी पर निकले कई जवानों के हाथ में बंदूक नहीं दी जाती है। यह शांति प्रक्रिया का हिस्सा है।
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शिंदे ने कहा कि इसी विश्वास को कायम करने के मकसद से वह सालों बाद लाल चौक बिना किसी सुरक्षा कवच के गए थे। आतंकवाद और पाक पर नरमी के आरोप के जवाब में गृह मंत्री ने एलान किया कि इन दोनों को माकूल जवाब दिया जाएगा। यहां किसी ने चूड़ियां नहीं पहन रखी है, सब के हाथ में ताकत है।
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