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छात्रा ने पूछा ऐसा सवाल, मोदी सरकार के छूटे पसीने

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हमारे देश के दो नाम क्यों हैं- 'भारत' और 'इंडिया'। भारत सरकार से यह जानने की कोशिश की थी सहारनपुर के लार्ड महावीरा एकेडमी की छात्रा निहारिका अग्रवाल ने। सरकार की ओर से उसे संतोषजनक जवाब ही नहीं मिला।
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आरटीआई में उठाए गए छात्रा के इस सवाल पर गृह मंत्रालय से जवाब मिला है कि प्रश्न काल्पनिक हैं और यह ‘सूचना’ के अंतर्गत नहीं आता है। इसलिए सूचना नहीं दी जा सकती। ऐसा जवाब आने पर छात्रा की जिज्ञासा शांत होने की बजाय और बढ़ गई है।

अब वह अपीलीय अधिकारी गृह मंत्रालय के समक्ष यह सवाल उठाएगी। उसका कहना है कि इसका कारण जानने तक वह चैन से नहीं बैठेगी।
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सरकार के जवाब से नाखुश हैं निहारिका

रानी बाजार स्थित हरनाथपुरा निवासी अनुपम गर्ग की पुत्री और लार्ड महावीरा एकेडमी की कक्षा 11 की छात्रा निहारिका अग्रवाल ने अक्तूबर में भारत सरकार से सवाल पूछा कि 'मैं आपसे जानना चाहती हूं कि जैसे कि किसी भी देश का नाम एक व्यक्तिवाचक संज्ञा होती है और व्यक्तिवाचक संज्ञा की परिभाषा यह होती है कि उसका अनुवाद नहीं किया जाता। उसे हर भाषा में उसी प्रकार लिखा जाता है। जैसे जापान, भूटान, पाकिस्तान आदि। अब आप मुझे बताएं कि भारत के कानूनी तौर पर दो नाम भारत और इंडिया क्यों हैं।'

छात्रा के इस सवाल पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से लोक सूचना अधिकारी वीके राजन ने जवाब भेजा कि, 'आवेदन की विषयवस्तु के माध्यम से पृच्छाएं और काल्पनिक प्रश्न उठाए हैं। यह सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा-2 (च) के तहत विनिर्दिष्ट सूचना की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आते हैं। इसके मद्देनजर मंत्रालय इस संबंध में कोई सूचना दे पाने की स्थिति में नहीं है।'

अब अपीलीय अधिकारी से पूछेंगी
अपने सवाल पर भारत सरकार के जवाब से नाखुश निहारिका अग्रवाल कहतीं हैं कि अभी वह पीछे नहीं हटेंगी। इस मामले में अब वह अपीलीय प्राधिकारी सतपाल चौहान, संयुक्त सचिव (प्रशासनिक) गृह मंत्रालय के समक्ष फिर से सवाल उठाएंगी। जवाब मिलने तक वह रुकेगी नहीं। निहारिका कहती हैं कि उसकी यही इच्छा है कि देश को हिंदी, इंगलिश या अन्य भाषा में भारत ही लिखा जाए और भारत ही बोला जाए।
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