प्राइवेट सेक्टर में रिश्वत मुक्त माहौल तैयार करने के उद्देश्य से सरकार भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में संशोधन कर सरकार इसे दंडनीय अपराध की श्रेणी में लाने पर विचार कर रही है।
निजी व लोक शिकायत और पेंशन मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा, ‘आईपीसी के अंतर्गत प्राइवेट सेक्टर में रिश्वत पर दंड देने का प्रावधान नहीं है। भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के अभियान पर हस्ताक्षर किए हुए हैं। इसलिए हम निजी क्षेत्र में भी रिश्वत लेने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में लाने पर विचार कर रहे हैं।’
उन्होंने बताया कि इसमें संशोधन करने के लिए फिलहाल सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बात की जा रही है। नारायणसामी ने कहा कि अभी तक प्राइवेट सेक्टर को कवर करने के लिए रिश्वत रोधी कानून में संशोधन पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सराकर ने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं रखा है, जिसमें भ्रष्टाचार मुक्त सेवा मौलिक अधिकार हो।