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अब 'आकाश' पाने का सपना नहीं हो पाएगा सच?

Sat, 23 Mar 2013 12:04 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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भारतीय छात्रों के हाथों में दुनिया का सबसे सस्ता टैबलेट ‘आकाश’ देने का वादा अब शायद ही पूरा हो सके।
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जमीन पर पूरी तरह से उतरने से पहले ही यह योजना अब दम तोड़ती नजर आ रही है। मानव संसाधन मंत्रालय अब आकाश योजना को ही बंद करने पर विचार कर रहा है।

इसका भविष्य तय करने के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

मानव संसाधन मंत्री पल्लम राजू ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि बाजार में तमाम सस्ते टैबलेट मौजूद हैं और छात्र उनमें से कोई भी चुन सकते हैं। आकाश के निर्माण के लिए देश में पर्याप्त ढांचा मौजूद नहीं है।

जबकि, कुछ महीने पहले ही मानव संसाधन मंत्री ने आकाश-2 टैबलेट को राष्ट्रपति के हाथों लोकार्पण कराते हुए कहा था कि वे जल्द ही 50 लाख आकाश टैबलेट खरीदने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।
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राजू ने कहा कि शिक्षा में आईसीटी (इंफार्मेशन कम्युनिकेशन टेकभनालॉजी) को बढ़ावा देने के लिए गैजेट कोई मुद्दा नहीं है। आकाश की सफलता के बाद देश में टैबलेट के दामों में भारी कमी आ गई है।

राजू ने वर्ष 2012-13 में आकाश टैबलेट खरीदने के लिए मिले 700 करोड़ रुपए के इस्तेमाल तथा प्रस्तावित 50 लाख टैबलेट खरीदने की योजना पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के बारे में कहा कि देश में इतनी बड़ी संख्या में आकाश टैबलेट बनाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

इससे पहले एक लाख टैबलेट खरीद के लिए दिए गए आर्डर की डेटाविंड कंपनी द्वारा अभी तक आपूर्ति नहीं किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके निर्माण के लिए देश में ढांचागत सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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उन्होंने डेटाविंड के खिलाफ देरी के लिए कार्रवाई कर दूसरी कंपनियों को आर्डर दिए जाने के सुझाव पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उच्च शिक्षा सचिव अशोक ठाकुर ने बताया कि हम आकाश योजना की समीक्षा कर रहे हैं।

इस संबंध में गठित गोवर्धन मेहता कमेटी की रिपोर्ट मिल चुकी है। तकनीकी समीक्षा के लिए राजेंद्र पवार कमेटी का गठन किया गया है।

पवार निजी क्षेत्र की कंपनी एनआईआईटी के चेयरमैन हैं। पवार कमेटी की रिपोर्ट के बाद आकाश टैबलेट योजना के भविष्य पर मंत्रालय अंतिम फैसला लेगा।
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