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अब गोविंदाचार्य भी हुए 'आप' के मुरीद

Sun, 12 Jan 2014 08:28 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
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प्रख्यात चिंतक व विचारक केएन गोविंदाचार्य ने माना है कि देश में लागू किया गया लोकपाल बिल खामियों से भरा है। उस पर अभी भी सियासत हावी है। उसमें सुधार व बदलाव की जरूरत है।
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रहा सवाल ‘आप’ का तो देश में स्थापित दलों से निराशा मिलने पर पनपे जनाक्रोश व अभियान का परिणाम ‘आप’ है। यह देश के लिए शुभ संकेत हैं लेकिन सोच व कार्य का आकलन लोकसभा चुनाव के बाद किया जा सकेगा।

गोविंदाचार्य शनिवार को महानगर में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में गांधी, लोहिया, दीनदयाल, अंबेडकर, जेपी, मार्क्स से प्रभावित लोगों ने ‘आप’ में शिरकत की है। चारित्रिक अभियान की शुरुआत हुई है। नैतिक मूल्यों की राजनीति व शुचिता पर जोर बढ़ा है।
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इसी लोकलाज के चलते राहुल गांधी ने आदर्श घोटाले में कार्रवाई के लिए दबाव बनाया। संजय निरुपम ने बिजली दर कम करने की आवाज उठाई। वसुंधरा राजे सिंधिया ने मुख्यमंत्री बनने के बाद बड़ा मकान नहीं लेने का फैसला लिया।

यह उसी जन अभियान का असर है। कम से कम नैतिकता के कर्मकांडों की शुरुआत स्थापित दलों ने भी कर दी। इसके परिणाम आगे भी देखे जाएंगे। उन्होंने खुद के राजनीति के सवाल पर कहा कि मूल्यों व मुद्दों की राजनीति कर रहे हैं। सत्ता व चुनाव की सियासत से दूर हैं।

किसी नए दल से उम्मीद नहीं पाली जा सकती। रामदेव, अन्ना हजारे, अरविंद केजरीवाल मूल्यों की सियासत कर रहे हैं।

सभी के मंच अलग हैं लेकिन एक मंच पर आने के सवाल पर कहा कि हमारा संवाद व विश्वास जरूर सभी से है। उन्होंने भाजपा, सियासत में वापसी, पीएम द्वारा मोदी पर की गई टिप्पणी पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
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