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राज्यपालों पर मोदी सरकार का नया 'फरमान'

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गृह मंत्रालय की ओर से जारी नई अधिसूचना के मुताबिक राज्यपालों को अब अपने राज्य में सालाना 292 दिन रहना जरूरी होगा। इसके अलावा अब राज्यपाल राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना राज्य से बाहर भी नहीं जा पाएंगे।
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हाल में कई राज्यपालों के लंबे समय तक राज्य से बाहर रहने के मामले उजागर होने के बाद केंद्र सरकार ने यह अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना में केंद्र सरकार ने कहा है कि राज्यपालों को अपने संबंधित राज्यों में साल में कम से कम 292 दिन हरहाल में रहना होगा।

गृह मंत्रालय की ओर से अधिसूचित 18 बिंदुओं के नए नियमों में कहा गया है कि कोई भी यात्रा राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति लिए बिना, आकस्मिक या अभूतपूर्व परिस्थितियों में बिना राष्ट्रपति सचिवालय को पूर्व में सूचित किए बगैर नहीं होनी चाहिए।
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अगर अंतिम क्षण में यात्रा की योजना बनती है तो ऐसी स्थिति में राज्यपालों को इसका कारण स्पष्ट करना होगा।
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गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना

राज्य से बाहर यात्रा करने की स्थिति में राष्ट्रपति भवन को जानकारी यात्रा की तिथि से एक से छह सप्ताह के बीच भेजनी होगी। और यह इस बात पर निर्भर करेगा कि यात्रा आधिकारिक है या निजी। यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि उन्हें देश या विदेश में कहां जाना है।

राज्यपालों को अपने आग्रहों को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव और गृह मंत्री को संबद्ध करना जरूरी होगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि निजी यात्रा को आधिकारिक यात्रा नहीं दर्शाया जाए, राजभवन को प्रत्येक आधिकारिक यात्रा, घरेलू या निजी यात्रा का ब्योरा राष्ट्रपति को देना होगा।

अधिसूचना में कहा गया है कि राज्यपालों के लिए यात्रा की अवधि वर्ष के 20 फीसदी दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह भी कहा गया है कि राज्यपालों को निश्चित तौर पर विदेश यात्रा से पहले विदेशी चंदा नियमन अधिनियम के तहत और राजनीतिक मंजूरी प्राप्त करनी चाहिए।

माना जा रहा है कि राज्यपालों के सुविधाओं के दुरुपयोग के कुछ मामले सामने आने के बाद सरकार ने इस तरह के निर्देश पेश करने का निर्णय लिया है।
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