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जमाखोरी बनेगा गैर जमानती अपराध

Sat, 05 Jul 2014 09:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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महंगाई से मुकाबले के लिए केंद्र और राज्यों सरकारों ने जमाखोरों पर निशाना साधा है। राज्यों के खाद्य मंत्रियों के साथ केंद्र ने 6 महीने का एक्शन प्लान तैयार किया है।
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इसके तहत जमाखोरी को गैर जमानती अपराध घोषित किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम को सख्त बनाया जाएगा।

सरकार ने आपात स्थिति के लिए हर जिले में भंडारण व्यवस्था करने का फैसला किया है। इसके अलावा राज्य स्तर पर महंगाई पर निगरानी भी रखी जाएगी।
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बिचौलियों पर होगी कार्रवाई

खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने जमाखोरी को देशद्रोह तक करार दिया है। उनका कहना है कि अच्छी उपज होने के बावजूद जमाखोरी के चलते कुछ वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। इसे रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करना होगा।

पासवान ने बताया, "जमाखोरी को गैर जमानती अपराध घोषित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम को सख्त बनाया जाएगा। मौसमी महंगाई से निपटने के लिए देश के हर जिले में कम से कम एक स्टोरेज की व्यवस्था की जाएगी। कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार मूल्य स्थिरता कोष और कृषि उत्पादों के लिए कॉमन नेशनल मार्केट बनाने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है।"

'भरपूर उत्पादन, घबराने की जरूरत नहीं'

वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है, "हर साल जुलाई से दिसंबर के दौरान कुछ वस्तुओं की महंगाई बढ़ जाती है। देश में आलू और प्याज का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, लेकिन कमजोर मानसून की आशंका का फायदा उठाने के लिए जमाखोरी हो रही है। इसके बावजूद अभी भी प्याज के दाम पिछले साल से कम हैं।"

जेटली का कहना है कि मानसून और महंगाई को लेकर फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
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एससी-एसटी को मिलेगी खाद्य सुरक्षा

केंद्र सरकार ने राज्यों को छह महीने के अंदर स्टेट लेवल मॉनिटरिंग सेल बनाने को कहा है। इससे महंगाई पर तुरंत काबू पाने में मदद मिलेगी। हालांकि, महाराष्ट्र के खाद्य मंत्री अनिल देशमुख ने महंगाई रोकने का पूरा जिम्मा राज्यों पर डालने पर आपत्ति जताई है।

मोदी सरकार यूपीए के गेमचेंजर खाद्य सुरक्षा कानून का दायरा बढ़ाएगी। केंद्र ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को कानून के दायरे में लाने का फैसला किया है।

पासवान ने बताया, "पहले, दूसरे और तीसरे दर्जे के सरकारी कर्मचारियों और आयकर दाताओं के अलावा पूरी एससी-एसटी आबादी को खाद्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा। केंद्र ने राज्यों को यह कानून लागू करने के लिए 3 महीने का अतिरिक्त समय दिया है, लेकिन कई राज्यों ने अधूरी तैयारियों का हवाला देकर छह महीने से एक साल का समय मांगा है। समय-सीमा और लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए कानून में जरूरी संशोधन किए जाएंगे।"
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