चुनावी मौसम में सरकार गरीबों और आम आदमी की झोली में चुनावी सौगात देने की हर जुगत में जुटी है। अब सरकार की नजरे इनायत गैर सहायता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में वंचित तबके यानी ईडब्लयूएस के छात्रों पर हुई है।
केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि वे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे इन छात्रों का खर्चा खुद उठाएगी। सरकार के इस कदम के बाद प्राइवेट स्कूलों के लिए यह कहना मुश्किल हो जाएगा कि उन्हें सरकार से कोई पैसा नहीं मिलता है, इसलिए वे ईडब्लयूएस के तहत छात्रों को भर्ती करने के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं।
यही नहीं, स्कूलों को अब वंचित तबके के छात्रों को तय नियमों के मुताबिक ही पूरी सुविधाएं देनी भी पड़ेंगी।छात्रों की पढ़ाई लिखाई का खर्चा उठाने के लिए सरकार ने अपने खजाने से लगभग 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है।
यह राशि 2016-17 तक खर्च करने की बात है। वित्त और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की व्यय एवं वित्तीय समिति ने बुधवार को इसे मंजूरी दे दी है। अब सरकार जल्द यह मसला कैबिनेट के सामने लाने की तैयारी में है।
सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट में इसकी मंजूरी तय है। निजी स्कूलों को आर्थिक सहायता देने के मामले में केंद्र और राज्य दोनों की भागीदारी तय करने की बात है।
इस भागीदारी में केंद्र की ओर से 65 तो राज्य की तरफ से 35 फीसदी का अनुपात तय किया गया है। दरअसल, लंबे समय से वंचित तबके के छात्रों के लिए निजी स्कूलों को आर्थिक सहायता देने की बात चल रही थी।
प्राइवेट स्कूल लगातार यह दलील देते थे कि वे सरकार के शिक्षा के अधिकार के कानून (आरटीई) के तहत नहीं आते क्योंकि उन्हें सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती।
यही नहीं, स्कूल वंचित तबके के छात्रों की 25 फीसदी सीटें भरते भी नहीं थे। वे छात्रों को यूनिफार्म और पुस्तकें देने में भी आनाकानी करते थे। मगर अब सरकार के इस फैसले के बाद प्राइवेट स्कूलों के लिए ऐसा करना आसान नहीं रहेगा।