भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल विधेयक को संसद में पेश करने के लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि लोकपाल विधेयक पर प्रवर समिति की ज्यादातर सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है। लिहाजा संसद के बजट सत्र के दौरान विधेयक संशोधित मसौदे को पारित कराने के लिए लाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी नारायणसामी के मुताबिक संशोधित विधेयक को जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इसे संसद में लाया जाएगा। नारायणसामी ने कहा कि समिति के अधिकतर विचारों पर सहमति बन गई है।
सरकार की असहमति वाले बिंदुओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह बहुत गौण बिंदु हैं। मगर इस बारे में उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि जब तक कैबिनेट इस पर विचार नहीं कर लेती, तब तक इस बारे में ज्यादा नहीं कहा जा सकता।
वर्ष 2011 में लोकसभा में पारित हो चुके भ्रष्टाचार निरोधी लोकपाल विधेयक के कई प्रावधानों को राज्यसभा में विरोध का सामना करना पड़ा। इनमें राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति को अनिवार्य बनाने वाले प्रावधान का सबसे कड़ा विरोध हुआ था। कई दलों ने कहा कि यह देश की संघीय व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।
विधेयक पर तीखे मतभेद उभरने पर इसे प्रवर समिति को भेज दिया गया। समिति ने पिछले वर्ष नवंबर में अपनी सिफारिशें उच्च सदन के पटल पर रख दी थी। राज्यसभा में लोकपाल विधेयक के पारित हो जाने के बाद इसे फिर से लोकसभा को भेजा जाएगा ताकि संशोधित प्रारूप को मंजूरी मिल सके।