डीएमके द्वारा समर्थन वापसी के बाद यूपीए सरकार एक बार फिर सपा और बसपा के भरोसे हो गई है। हालांकि वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि सरकार को कोई खतरा नहीं है।
संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में चिदंबरम ने कहा कि सरकार के पास पूर्ण बहुमत है। वह स्थिर है और काम करती रहेगी।
सरकार पर संकटः डीएमके ने लिया समर्थन वापस
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) का नेतृत्व कर रही कांग्रेस के लिए राहत की बात ये है कि 18 सदस्यीय डीएमके समर्थन वापस ले लेने के बाद भी उसका आंकड़ा 289 के आस-पास है, जबकि बहुमत के लिए सरकार को 272 सदस्यों की ही जरूरत है।
यूपीए गठबंधन की सरकार में कांग्रेस के 205, राष्ट्रवादी कांग्रेस के 9, राष्ट्रीय लोकदल के 5, नेशनल कांफ्रेस के 3 और 8 अन्य सदस्य शामिल है। इन्हें जोड़कर ये संख्या जोड़कर 230 पहुंचती है।
यूपीए सरकार को समाजवादी पार्टी के 22, बहुजन समाज पार्टी के 21, राष्ट्रीय जनता दल के 4 और जनता दल (सेक्ूयलर) के 3 सदस्य बाहर से समर्थन कर रहे हैं। सरकार को 9 निर्दलीय सदस्यों का भी समर्थन हासिल है।
केंद्र सरकार को कोई खतरा नहीं: चिदंबरम
सरकार को बाहर से समर्थन कर रहे सदस्यों की संख्या 59 है। सरकार में शामिल और उसे बाहर से समर्थन दे रहे सदस्यों को जोड़ दें तो ये संख्या 289 तक पहुंच जाती है। ये आंकड़ा बहुमत से बहुत ऊपर है, जो यूपीए के लिए राहत भरी बात है।
सपा और बसपा का रुख
फिलहाल सरकार के सामने बहुमत सिद्घ करने जैसी स्थिति नहीं आई है। हालांकि ऐसी स्थिति आती है तो यूपीए के लिए सपा और बसपा का समर्थन पाना सबसे अहम होगा।
'यूपीए सरकार का बने रहना देशहित में नहीं'
हालांकि सरकार के लिए राहत की बात ये है कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और बसपा मुखिया मायावती, दोनों ने ही यूपीए को समर्थन जारी रखने की बात कही है।