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मैगी की मुश्किलें बढ़ी, सरकार ने किया 640 करोड़ का मुकदमा

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मैगी विवाद में दिग्गज कंपनी नेस्ले इंडिया के खिलाफ सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मंगलवार को नेस्ले के खिलाफ कथित रूप से अनुचित व्यापार व्यवहार में संलिप्त होने, गलत लेबलिंग और मैगी नूडल्स के संबंध में भ्रामक विज्ञापन दिखाने पर 640 करोड़ रुपये हर्जाने का केस दायर किया।
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खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि विभाग ने मैगी विवाद में नेस्ले इंडिया के खिलाफ केस दायर करने की सिफारिश की थी। अंतत: हमने शिकायत दर्ज करा दी।

पासवान ने हालांकि हर्जाने की रकम के बारे में जानकारी नहीं दी। नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की। प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी के पास इस मुद्दे की कोई जानकारी नहीं मिली है।
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एनसीडीआरसी के समक्ष दर्ज कराई शिकायत

सूत्रों के मुताबिक, विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की प्रावधान 12 (1डी) का प्रयोग करते हुए मैगी विवाद में नेस्ले इंडिया के खिलाफ एनसीडीआरसी में केस दर्ज कराया।

विभाग ने 640 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। सरकार ने इसके लिए तीन दशक पुराने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधान का प्रयोग किया है।

मैगी नूडल्स में मोनो सोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) की मौजूदगी के बावजूद कंपनी का कहना था कि इसमें एमएसजी नहीं है। सूत्रों ने कहा कि कंपनी पर मैगी नूडल्स को सेहतमंद बताने पर भ्रामक विज्ञापन ‘टेस्टी भी, हेल्दी भी’ दिखाने का भी आरोप लगाया गया है।

सरकार ने कहा, मैगी नूडल्स में थी सीसे की अधिकता

सरकार का कहना है कि नेस्ले इंडिया को मैगी के सैंपल में तय सीमा से अधिक सीसा पाए जाने और लेबलिंग के नियमों का उल्लंघन करने पर मैगी नूडल्स को बाजार से वापस मंगाने को कहा गया था।

मंगलवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि विभिन्न राज्यों से जांच परिणाम के आधार पर तय सीमा से अधिक सीसे की पुष्टि होने पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसआई) ने नेस्ले इंडिया को मैगी नूडल्स को बाजार से वापस मंगाने का निर्देश दिया था।

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