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सपा-बसपा में संतुलन बैठाने की मशक्कत में सरकार

Fri, 30 Nov 2012 11:08 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के मसले पर राज्यसभा में पांच और छह दिसंबर को चर्चा के साथ वोटिंग होगी। इसी के साथ ही राज्यसभा में नंबर की कमी से बेचैन यूपीए सरकार के रणनीतिकारों की संख्या बल जुटाने की मशक्कत तेज हो गई है। जबकि दूसरी तरफ सपा और बसपा अभी तक अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं है।
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सपा हालांकि अब संसद में वोटिंग के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला मुलायम सिंह यादव पर छोड़ने की बात कह रही है। वहीं मायावती संसद में वोटिंग के दौरान फैसला लेने की बात कह रही है। दोनों ने सरकार पर सियासी दबाव बनाने की पूरी भूमिका बना रखी है, जबकि सरकार का दावा है कि दोनों पार्टियां देर सवेर खुलकर सरकार की मदद करेगी।

राज्यसभा में अंकगणित मजबूत करने के लिए सरकार को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। छोटी से लेकर बड़ी पार्टियों के साथ-साथ सचिन तेंदुलकर, रेखा और अनु आगा जैसे नामित सदस्यों पर भी सरकार ने नजर गढ़ा रखी है। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट होने की वजह से सचिन का वोटिंग में शामिल होना मुश्किल है। इनके अलावा सपा और बसपा को अपने पाले में लेने में सरकार के मैनेजर लगातार मुलायम सिंह यादव और मायावती से संपर्क में है।
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शुक्रवार को सपा के रुख में थोड़ी नरमी देखी गई, मगर पार्टी ने अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि संसद में वोटिंग के मसले पर मुलायम सिंह यादव ही अंतिम फैसला करेंगे। जबकि रामगोपाल यादव ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में सरकार के खिलाफ वोटिंग की बात कह दी थी। अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ही पहली सरकार है, जिसने खुलकर कहा है कि वह प्रदेश में इसे लागू नहीं करेगी। जबकि भाजपा के किसी मुख्यमंत्री ने अभी तक इसके खिलाफ एक शब्द नहीं बोला है।

इसी के साथ ही सपा ने सरकार पर प्रमोशन में आरक्षण विधेयक को लेकर पूरा दबाव बना रखा है। सपा ने शुक्रवार को भी इसका विरोध किया। पार्टी केंद्र सरकार पर दबाव डालकर विधेयक को टलवाने की फिराक में है। उधर, सपा के ठीक उलट बसपा विधेयक को पारित करवाने के लिए यूपीए सरकार पर पूरा दबाव बना रही है। सपा की रणनीति को भांपते हुए बसपा ने सरकार की गर्दन फंसा रखी है।

मायावती ने संसद में ही रणनीति तय करने की बात कर सरकार की धड़कन बढ़ा दी है। उधर, सरकार के मैनेजर आरक्षण विधेयक को लेकर सपा और बसपा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार ने बसपा को कह दिया है कि वह राज्यसभा में बिल पेश करने के लिए तैयार है। साथ ही उसने सपा को भी कह दिया है कि वह सदन में प्रमोशन में आरक्षण बिल पेश करने दे। मगर शोर शराबे और हंगामे के चलते इसके पारित होने की बेहद कम संभावना है।
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