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घाटे में सरकार, शिक्षा बजट में 5000 करोड़ की कटौती

Thu, 03 Jan 2013 09:30 PM IST
नई दिल्ली/बृजेश सिंह
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सरकार के बढ़ते राजकोषीय घाटे ने केंद्र की सबसे बड़ी शैक्षणिक-सामाजिक परियोजनाओं पर असर डालना शुरू कर दिया है। इस घाटे की गहरी गाज देश की दो सबसे अहम शैक्षणिक योजनाओं सर्वशिक्षा अभियान और शिक्षा का अधिकार कानून समेत मानव संसाधन मंत्रालय पर गिरी है। वित्त मंत्रालय ने राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए मानव संसाधन मंत्रालय के चालू साल के बजट में पांच हजार करोड़ से ज्यादा की कटौती कर दी है।
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मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू के शैक्षिणक बजट में कटौती नहीं करने के अनुरोध को ठुकराते हुए वित्त मंत्रालय ने 2012-13 के लिए मानव संसाधन मंत्रालय के आवंटित बजट में 5199 करोड़ रुपए की कमी करने का फैसला लिया है।

गौरतलब है कि चालू वित्तीय वर्ष के लिए मानव संसाधन मंत्रालय ने उच्च शिक्षा तथा स्कूल शिक्षा के लिए कुल 75,000 करोड़ रुपए मांगे थे। इसमें शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू करने के लिए 45,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी शामिल था। सरकार ने बजट में केवल 61,407 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की थी। अब इसमें से भी पांच हजार करोड़ रुपए की कटौती करने का फैसला लिया है।
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मानव संसाधन मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग के लिए आवंटित 45,969 करोड़ रुपए के बजट को वित्त मंत्रालय ने घटाकर अब 42,729 करोड़ कर दिया है। इस बजट में सर्वाधिक राशि 25 हजार करोड़ रुपए आरटीई के लक्ष्य के लिए तय थी। इसमें से 2000 करोड़ रुपए की कटौती की गई है।

इस कटौती का सबसे ज्यादा प्रभाव टीचर्स ट्रेनिंग योजना पर पड़ेगा। इस योजना के लिए आवंटित 500 करोड़ रुपए में से ज्यादातर अभी खर्च नहीं किया जा सका था। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए इस साल से यह महत्वपूर्ण योजना शुरू किए जाने का लक्ष्य रखा गया था।

उच्च शिक्षा के मद में चालू वित्तीय वर्ष के लिए आवंटित 15,438 करोड़ के बजट को घटाकर 13,479 करोड़ कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय ने मानव संसाधन मंत्रालय को पत्र भेजकर कटौती के बाद की राशि के अनुसार मदवार व्यय का नया विवरण तैयार कर सात जनवरी तक भेजने को कहा है। वर्ष की अंतिम तिमाही में इस कटौती से उन विभागों में हड़कंप मच गया है जो तय बजट खर्च करने में काफी पीछे चल रहे हैं।
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