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मोदी के बनारस दौरे में क्या काशी के कोतवाल हैं अड़ंगा?

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वाराणसी से सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे के रद्द होने की खबर जैसे ही आयी,पान और चाय की दुकानों पर चर्चाओं का दौर चल पड़ा।
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‘मोदी एतना बार बनारस अइलन, भैरवनाथ के इहां एक बार भी नाहीं पहुंचलन... जबले काशी कोतवाल के ना पूजिहन, इहां आ नाहीं पइहन...।’ पीएम का बनारस दौरा रद्द होने की जानकारी सार्वजनिक होते ही गुरुवार को लंका चौराहे की चाय पर दूकान पर यह कहना था बुजुर्ग राधेश्याम यादव का।

साथ मौजूद रहे लालमनि राय, हर्षनाथ सिंह और नखड़ू मौर्र्या ने भी चाय की चुस्की लेकर हां में हां मिलाते हुए कहा कि ‘एकदम सही कहला, राधे भइया... देखेला नाहीं, बनारस में चाहे कलेक्टर आवैं या कप्तान, कालभैरव बाबा के दरबार में हाजिरी लगउले बिना केहू चारज न लेवेला... ई बात भाजपइयन के समझ के मोदी के भी समझावे के चाही...।’
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इंतजाम में खर्चे रुपयों से गरीबों का होता भला

18 दिन के भीतर गुरुवार को पीएम का काशी आगमन दूसरी बार रद्द हुआ। इसे लेकर बनारस की अड़ियों और चाय-पान की दूकानों पर जुटे लोग बनारसी मिजाज में अपने तरीके से विश्लेषण करते रहे। डीएलडब्ल्यू गेट से बाहर निकलते ही बाएं हाथ की ओर चाय की दूकानों पर लोग ये कहते सुने गए कि ‘मोदी, गंगा जी गइलन, बाबा विश्वनाथ के दर्शन कइलन... लेकिन कालभैरव बाबा के भुला देलन... ऐसे में ओन कइसे एतना आसानी से बनारस आ पइहन...।’

रविदास गेट के समीप चाय-पान की दूकान पर जुटे लोग पीएम के आगमन के नफा-नुकसान को लेकर गंभीर थे। कहना था कि ‘भइया, सरकार हऊअन... नौ नाहीं नौ सौ करोड़ रुपया उड़ा सकेलन... इहय पैसवा से जनता के बहुत कुछ हो सकेला... लेकिन ऐतना के सोचेला...।’

प्रधानमंत्री का दौरा निरस्त होने के बाद ऐसी ही अंतहीन चर्चाएं अस्सी, गोदौलिया, चौक, मैदागिन सहित शहर के अन्य हिस्सों में जारी रहीं।

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