अमेरिकी सरकार के इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले विदेशियों की जासूसी करने के बवाल पर गूगल और फेसबुक ने अपनी सफाई दी है।
दोनों ही कंपनियों ने ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट में खुद के शामिल होने से इंकार किया है।
अमेरिका स्थित दोनों कंपनियों ने कहा है कि उनके संगठन इस तरह के किसी भी प्रोग्राम से अनभिज्ञ हैं। इस प्रोग्राम का कोड नाम प्रिज्म है। यह मामला देश विदेश में सुर्खियों में है।
फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकेरबर्ग ने अपने प्रोफाइल में शुक्रवार को लिखा कि फेसबुक ने अमेरिका या किसी अन्य सरकार को अपने सर्वरों में सीधी पहुंच की अनुमति नहीं दी है और न ही कभी ऐसे किसी प्रोग्राम का हिस्सा रहा है।
हमें थोक में जानकारी या मेटाडेटा के लिए किसी सरकारी एजेंसी से कोर्ट आदेश या कोई अनुरोध नहीं मिला है। अगर ऐसा होता तो भी हम इसका पुरजोर विरोध करते। हमने आज से पहले प्रिज्म के बारे में नहीं सुना था।
इसी तरह का बयान गूगल के सह संस्थापक और सीईओ लेरी पेज और मुख्य कानूनी अधिकारी डेविड ड्रूममंड ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में कही है।
दोनों का कहना है कि सर्वप्रथम, हम ऐसे किसी प्रोग्राम में शामिल नहीं रहे हैं, जिससे अमेरिकी सरकार या किसी अन्य सरकार को हमारे सर्वरों में सीधी पहुंच मिली हो।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इंटरनेट कंपनियों अमेरिकी सरकार के गुप्त कार्यक्रम प्रिज्म में शामिल हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को गूगल के सर्वरों में सीधे पहुंच की अनुमति दी गई है।