दस साल से जारी सत्ता का सूखा खत्म होते ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के भी अच्छे दिन आ गए हैं। सत्ता में बदलाव के साथ ही न केवल संघ की शाखाओं की संख्या बढ़ी है, बल्कि इन शाखाओं में भाग लेने वालों की संख्या भी अचानक बढ़ गई है।
इस दौरान ज्यादातर उन जगहों पर नए सिरे से शाखाएं लगनी शुरू हुई हैं, जहां बीते कुछ वर्षों से लोगों की रुचि न दिखने के कारण शाखा लगाना बंद कर दिया गया था।
शाखाओं की संख्या पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में ज्यादा बढ़ी हैं, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में बंद हो चुकी शाखाएं फिर से शुरू हुई हैं। इसके अलावा भाजपा में प्रभाव बढ़ाने के इच्छुक नेता, टिकटों के दावेदार इन दिनों शाखा में लगातार उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
13 लाख सदस्य सक्रिय
राजग के सत्ता में रहते 2004 तक संघ के 13 लाख सक्रिय सदस्य थे और देश भर में संघ की 50000 शाखाएं लगाती थी। इसी साल केंद्र की सत्ता से विदाई के साथ ही शाखा की संख्या लगातार कम होती चली गई।
संघ सूत्रों के मुताबिक भाजपा की सत्ता से विदाई के बाद हालांकि सक्रिय सदस्यों की संख्या में कमी नहीं आई। इसमें कुछ बढ़ोत्तरी ही हुई। मगर शाखा की संख्या लगातार कम होती गई।
कई जगहों पर लोगों के रुचि न लेने के कारण शाखा लगना धीरे धीरे बंद हुआ तो कई जगहों पर शाखा लगाने के लिए पहल करने वालों ने ही रुचि लेनी बंद कर दी।
मोदी सरकार आने के बाद आई तेजी
उक्त सूत्र के मुताबिक मई महीने में केंद्र की सत्ता में परिवर्तन के बाद इस स्थिति में तेजी से बदलाव होना शुरू हुआ है। सत्ता परिवर्तन के महज दो महीने के बाद जिन जगहों पर शाखा लगनी बंद हो गई थी, उनमें से ज्यादातर जगहों पर फिर से शाखा शुरू हो गई है।
इसके अलावा कई नई जगहों पर भी शाखा की शुरुआत की गई है। वर्ष 2004 में ही संघ ने शाखा के प्रति दिलचस्पी बढ़ाने के लिए ड्रेस कोड में परिवर्तन को हरी झंडी दी थी। पहले शाखा में सिर्फ खाकी निक्कर और सफेद कमीज अनिवार्य था, मगर बाद में टी शर्ट और घुटने तक चुस्त पेंट पहनने की भी इजाजत दी गई।
दक्षिण के राज्यों में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश
संघ की योजना शाखाओं के माध्यम से दक्षिण के राज्यों खासकर तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में अपना प्रभाव बढ़ाने की है। संघ केरल में पहले से ही बहुत अधिक सक्रिय है, जबकि कर्नाटक में भी संघ का बड़ा आधार है।