बीते कुछ सालों में देश में दो ऐसे शख्स उभरे, जिन्होंने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की कोशिश की। अन्ना हजारे ने देशव्यापी अनशन के जरिए तो भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय ने निष्पक्ष ऑडिट से।
आज राय के रिटायरमेंट के साथ प्रशासनिक सुधार का एक अध्याय समाप्त हो रहा है।
इस मौके पर राय के जीवन और कामकाज से जुड़े तमाम अनछुए पहलुओं का जिक्र काफी अहम है। अमर उजाला ने राय के करियर पर नजर डालते हुए देश की कुछ नामचीन हस्तियों से उनकी राय जानी...
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अशोक खेमका, प्रख्यात प्रशासनिक अधिकारी
''मुझे विनोद जी से मिलने का मौका तो नहीं मिला, लेकिन उनकी ख्याति के बारे में मैं अक्सर सुनता रहा। उन्होंने स्वायत्तता बनाए रखी, बेहतरीन काम किया और पूर्व कैग चतुर्वेदी साहब के काम को नए आयाम दिए।''
''ईमानदारी का मतलब सिर्फ ईमानदारी से काम करना ही नहीं है, बेईमानी से डटकर मुकाबला करना भी है। यही विनोद राय जी की खूबी रही। उन्होंने अपने 40 साल के करियर को सार्थक किया है और वे युवा प्रशासनिक अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे।''
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निखिल डे, सामाजिक कार्यकर्ता
''विनोद राय होने का मतलब ही अलग है। उनका नाम आज की तारीख में ईमानदारी, निडरता और पारदर्शिता का पर्याय बन गया है। उन्होंने अपने कार्यकाल में न सिर्फ कैग का दायरा बढ़ाकर उसे सशक्त बनाया, बल्कि उसे जनता तक भी पहुंचाया।''
''उनके जरिए ही आम लोगों को पता चला कि इस देश में कैग नाम की एक संस्था भी है, जिसके प्रति हर किसी की जिम्मेदारी है। उनकी जगह आने वाले कैग की जिम्मेदारी और मजबूरी दोनों होगी कि राय के काम को आगे बढ़ाएं।''
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नीरजा चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार
''विनोद राय एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने प्रशासनिक कार्यशैली के तरीके को बदल कर रख दिया। मैं उन्हें ऐसे ही व्यक्ति के रूप में देखती हूं, जिसने प्रशासनिक जवाबदेही तय की और ईमानदारी के मापदंड का स्तर काफी ऊंचा कर दिया।''
''हालांकि, मैं यह भी मानती हूं कि राय का काम आसान कतई नहीं रहा। उन्होंने यह साबित कर दिया कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए साहस और ईमानदारी की कितनी अहमियत है। राय ने टीएन सेशन की गरिमा बढ़ाई है।''
''राय जिस मोड़ पर रिटायर हो रहे हैं, उसे बरकरार रखना अगले कैग के लिए बड़ी चुनौती होगी। राय की वजह से उन्हें हिम्मत भी मिलेगी और बहुत मुमकिन है कि सरकारी दबाव के बावजूद कैग निष्पक्ष होकर सवाल करते रहेंगे।''
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मनीष तिवारी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री
अगर उन्हें कोई बात कहनी है, तो इंटरव्यू के जरिए नहीं बल्कि आमने-सामने बैठकर बहस करें। (ट्वीट के जरिए)
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सत्यव्रत चतुर्वेदी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता
''विनोद राय का पूरा कार्यकाल शरारतपूर्ण रहा। अगर मैं सिर्फ उनके काम की गुणवत्ता को देखूं, तो उन्हें 10 में से 4 अंक दूंगा। दरअसल, वो एक एजेंडे पर काम कर रहे थे, जो बाद में सामने आ जाएगा।''
''जहां तक बात तमाम आरोप-प्रत्यारोप की है, तो उसमें भी हमेशा उन्हें जेपीसी और पीएसी में अपना स्टैंड बदलना पड़ा। कुल मिलाकर उनके बरताव में न तो तार्किकता देखने को मिली, न ही तथ्यात्मकता।''
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दफ्तर में सबके चहते हैं राय
भले ही सरकारी भ्रष्टाचार और अनियमिततओं पर विनोद राय का रुख बेहद सख्त रहा, लेकिन वह अपने सहकर्मियों के साथ परिवार सरीखे रहे।
कैग के मीडिया सलाहकार बी. एस. चौहान के मुताबिक, राय बेहद नम्र स्वभाव के हैं और
सभी से इज्जत से पेश आते हैं। सभी का उनसे काफी जुड़ाव है।
उनसे मिलने के लिए किसी अफसर को इंतजार नहीं करना पड़ता। कैग के अन्य अधिकारी ने बताया कि बस उन्हें अनुशासनहीनता से सख्त नफरत है। हालांकि, उनकी इसी खूबी का ही नतीजा है कि जो पहले जो ऑडिट दो-तीन साल में हुआ करते थे, वे आठ महीने में होने लगे।
सबकी जवाबदेही तय हुई और बेईमानी की कोई गुंजाइश नहीं रही। चौहान बताते हैं कि राय ने ही तकनीकी रिपोर्ट को आम इंसान के समझने लायक बनाने की पहल की।
राय ने कैग के अधिकारियों के प्रोफेशनल एक्सपर्टीज पर भी काफी जोर दिया और कई को इंटरनेशनल ट्रेनिंग भी दिलवाई। उनकी अगुआई में ही कैग ने संयुक्त राष्ट्र के कई ग्लोबल टेंडर जीते।