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गीतिका केस: अरुणा को नहीं मिली जमानत

Tue, 23 Apr 2013 01:08 AM IST
पीयूष पांडेय/नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक मामलों में प्रभावशाली लोगों को जल्द जमानत नहीं दी जा सकती क्योंकि जमानत मिलने पर वह मुकदमों और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
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सर्वोच्च अदालत ने यह टिप्पणी एयर होस्टेस गीतिका शर्मा आत्महत्या मामले में सह आरोपी अरुणा चड्ढा को जमानत देने से इंकार करते हुए की।

हालांकि अदालत ने इस मामले में निचली अदालत को जल्द आरोप तय करने को कहा है। चड्ढा हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा की करीबी हैं। कांडा इस मामले में मुख्य आरोपी हैं।

जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सह आरोपी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता यूयू ललित ने तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल को गत वर्ष 8 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और पिछले 110 दिन से वह जेल में हैं।
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इस मामले में आरोप पत्र दायर किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि मेरी मुवक्किल के खिलाफ सिर्फ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। ऐसे में उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।

इस पर पीठ ने कहा कि आरोपी बहुत ही प्रभावशाली हैं। यदि उन्हें जमानत प्रदान की गई तो वह मामले को प्रभावित कर सकती हैं।

वकील ने कहा कि मेरी मुवक्किल महिला हैं और उनका एक सात साल का बच्चा है, जिसकी वह अकेली अभिभावक हैं। उनके पीछे बच्चे को देखने वाला कोई नहीं है।

हालांकि पीठ ने उनकी दलील पर कोई रुख नहीं जाहिर किया। तब उन्होंने पीठ को बताया कि निचली अदालत ने अब तक इस मामले में आरोप तय नहीं किए हैं और याचिका को वापस लेने की मांग की।

इसके बाद पीठ ने निचली अदालत को जल्द आरोप तय करने का निर्देश दिया। साथ ही याचिका वापस लेने की गुजारिश को अनुमति प्रदान कर दी।

अरुणा ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने चड्ढा की याचिका को खारिज कर दिया था।

गौरतलब है कि गीतिका को 5 अगस्त को उनके दिल्ली के अशोक विहार स्थित घर पर मृत पाया गया था। 23 वर्षीय एयर होस्टेस ने अपने सुइसाइड नोट में लिखा था कि कांडा और चड्ढा के उत्पीड़न की वजह से वह अपने जीवन को समाप्त कर रही हैं।
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