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पुख्ता पहचान को भारतीय जवानों का बनेगा डीएनए प्रोफाइल

Tue, 23 Apr 2013 12:56 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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अमेरिका और इस्राइल की तर्ज पर अब भारतीय सेना भी अपने जवानों का डीएनए प्रोफाइल तैयार कराएगी। इस योजना के तहत सेना की मेडिकल कोर आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज (एएफएमएस) जवानों का डाटा बैंक तैयार करेगी।
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इस डीएनए डाटा बैंक की मदद से किसी हमले या दुर्घटना के दौरान शहीद हुए सैनिकों के शवों की पुख्ता पहचान हो सकेगी।

रक्षा मंत्री एके एंटनी ने सोमवार को लोकसभा में दी लिखित जानकारी में बताया कि पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज में डीएनए डाटा बैंक का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।

यहां सैनिकों का डीएनए प्रोफाइल तैयार कर एक ऐसा अनिवार्य प्रोटोकॉल विकसित किया जाएगा जिससे उनके शरीर से डीएनए सैंपल लेकर उनकी पहचान की जा सके।

इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट वर्ष 2014 तक पूरा होगा। भारतीय सेना में करीब 11 लाख सैनिक और अधिकारी शामिल हैं।

डीएनए प्रोफाइलिंग प्रोजक्ट
इस प्रोजेक्ट का मकसद सैनिकों की डीएनए प्रोफाइल के लिए ब्लड सैंपल लेने से लेकर उनकी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करने के दौरान उच्च सटीकता बरतना और पहचान के लिए उनके शरीर के किसी भी हिस्से से डीएनए सैंपल लेने का प्रोटोकॉल तैयार करना है।
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इस योजना के तहत किए पूर्व में किए अध्ययन के मुताबिक सैनिकों के ब्लड सैंपल उनकी यूनिट में तैनात डॉक्टरों द्वारा ही लिए जाएंगे। इन सैंपलों को 21 वर्ष तक स्टोर किया जा सकेगा।   

शहीदों की पहचान में होगी आसानी
दुर्गम मोर्चों और संवेदनशील इलाकों में होने वाली मुठभेड़ों या हमलों के बाद कई मामलों में शहीद सैनिकों की पहचान करना बेहद मुश्किल होता है।

इस तरह के मामलों में सैनिकों की डीएनए प्रोफाइल से उनके गंभीर रूप से क्षत-विक्षत शवों से सैंपल लेकर पहचान स्थापित करने में मदद मिलेगी। डीएनए के जरिए पहचान करना सबसे आधुनिक और सर्वमान्य तरीका है।

अमेरिका और इस्राइल की सेना भी डीएनए प्रोफाइल का इस्तेमाल करती हैं। वर्ष 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 हमले के बाद वहां की सेना में डीएनए प्रोफाइल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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