पेरिस के शार्ली एबदो अखबार के दफ्तर पर हुए आतंकी हमले के बाद खतरनाक अल्जीरियाई आतंकवादियों के खिलाफ फ्रांस की स्पेशल फोर्स जीआईजीएन (नेशनल गेंडारमेरी इंटरवेंशन ग्रुप) की सफल और सटीक कार्रवाई को देख भारतीय सुरक्षा एजेंसियां हतप्रभ हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने तीन दिन तक चले इस ऑपरेशन का बारीकी अध्ययन करने का फैसला किया है।
दुनिया की सर्वश्रेष्ठ ‘एंटी होस्टेड-टेरर एजेंसी’ में से एक माने जाने वाली जीआईजीएन ने अब तक बिना एक भी जान गंवाए दुनिया भर में कई सटीक ऑपरेशनों को अंजाम दिया है। खुफिया एजेंसियों की नाकामी के बावजूद इस एजेंसी ने जिस ढंग से ऑपरेशन को पूरा किया, उसकी दुनिया भर में तारीफ हो रही है।
26/11 मुंबई हमले की कार्रवाई को अंजाम देने वाले एनएसजी के शीर्षस्थ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि एजेंसी अगले हफ्ते से ही जीआईजीएन की इस कार्रवाई का अध्ययन करेगी। इस सिलसिले में एनएसजी कमांडो ट्रेनर की टीम को भी पेरिस भेजा जाएगा।
अधिकारी के मुताबिक बिना जान गंवाए काम को अंजाम देने के लिए दुनिया में मशहूर फ्रांस की इस एजेंसी ने लंबे अंतराल के बाद इस स्तर का ऑपरेशन किया है। हालांकि इसमें फ्रांस की पुलिस की अति प्रशिक्षित ‘रेड’ (रिसर्च असिस्टेंट इंटरवेंशन डिसॉसन) नाम की एजेंसी ने भी खासी भूमिका अदा की।
बिना जान गंवाए ऑपरेशन को अंजाम देने का बेदाग रिकार्ड
अधिकारी ने बताया कि 24 दिसंबर, 1994 को जीआईजीएन ने चार आतंकवादियों
द्वारा अपहरण किए गए फ्रांसीसी विमान के सभी 171 यात्रियों को बचा लिया था।
इनमें करीब 12 यात्रियों को मामूली चोटें आईं और करीब चार कमांडो घायल
हुए। जबकि विमान में मौजूद चारों आतंकियों को वहीं ढेर कर दिया गया।
जीआईजीएन
का यह ‘जीरो एरर’ ऑपरेशन दुनिया भर की एजेंसियों में ट्रेनिंग के दौरान
दिखाया जाता है। इससे पहले 1979 में सऊदी अरब के मक्का में बंधक प्रकरण से
निपटने के लिए भी इसी एजेंसी की मदद ली गई थी। मक्का में श्रद्धालुओं को
बंधक बनाने वाले आतंकियों को जीआईजीएन ने बड़ी सफाई से मार गिराया था।
सूत्रों
के मुताबिक उस समय सऊदी सरकार ने फ्रांस से इस एजेंसी की मदद के लिए खास
तौर पर गुजारिश की थी। अधिकारी ने बताया कि 9/11 और 26/11 की तरह पेरिस की
यह घटना भी आतंकवाद से प्रभावित देशों की नीति में आमूलचूल परिवर्तन करने
वाली है।
अधिकारी के मुताबिक 26/11 के एनएसजी ऑपरेशन के दौरान
बंधकों और कमांडो के मारे जाने की घटना को भुलाया नहीं जा सकता। हालांकि
किसी भी दो ऑपरेशनों की तुलना करना सही नहीं है क्योंकि प्रत्येक ऑपरेशन
अपने आप में बेहद खास होता है।
ऑपरेशन में नहीं गई एक भी जान
पेरिस की सुपरमार्केट में हुए आतंकी हमले के दौरान जीआईजीएन ने बेहद सावधानी से काम किया। न तो किसी कमांडो को कोई खरोंच आई और न ही किसी बंधक की जान गई। घटना में मारे गए चार बंधक पहले ही आतंकियों की गोलियों का शिकार हो चुके थे।
दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फोर्स में से एक जीआईजीएन
नेशनल गेंडारमेरी इंटरवेंशन ग्रुप (जीआईजीएन) को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ आतंकवाद रोधी एजेंसियों में से एक माना जाता है। अत्याधुनिक हथियारों से लैस जवानों की पहली प्राथमिकता नागरिकों की जान बचाना होता है। 1974 से 1985 के बीच जीआईजीएन ने अब तक 650 से ज्यादा ऑपरेशन सफलतापूर्वक निपटाकर 500 से ज्यादा नागरिकों की जान बचाई है।
आतंकियों से बातचीत में माहिर है ‘रेड’
फ्रांस पुलिस की स्पेशल फोर्स का नाम है-रिसर्च असिस्टेंट इंटरवेंशन डिसॉसन (रेड)। इन्हें हिंसक गतिविधियों से निपटने की विशेष ट्रेनिंग प्राप्त है। यह यूनिट बंधकों को छुड़ाने के लिए बातचीत करने में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। साथ ही जवाबी हमला करने में भी इसका जवाब नहीं है।
1993 में एक आतंकी अपने शरीर पर बम बांधकर एक स्कूल में घुस गया। रेड की टीम ने इंतजार किया। जब वह सो गया, तो जवान अंदर घुसे और उसे मार कर बच्चों को बचा लिया।