अगले साल मार्च से देश की सभी दवाइयों की दुकान पर टीबी की दवा मुफ्त मिलेगी। ट्यूबरक्यूलोसिस (टीबी) के मरीजों के बेहतर इलाज के लिए चलाई जा रही सरकारी योजना को ज्यादा प्रभावी बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह प्रस्ताव रखा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक इस प्रस्ताव को फाइनल रूप दे दिया गया है और इस योजना के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में 800 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके जरिए टीबी के सभी मरीज रिवाइजड नेशनल ट्यूबरक्यूलोसिस कंट्रोल प्रोग्राम (आरएनटीसीपी) के अंतर्गत आ जाएंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक जगदीश प्रसाद ने कहा, ‘इस योजना का लक्ष्य टीबी के उन गरीब मरीजों तक सुविधा पहुंचाना है, जो निजी डॉक्टर से इलाज करवा रहे हैं और दवाइयां बाहर कैमिस्ट की दुकान से खरीदते हैं।’ उन्होंने कहा कि इससे मरीजों में होने वाली इस बीमारी पर निगरानी रखी जा सकेगी।
योजना के बारे में विस्तृत रूप से बताते हुए प्रसाद ने कहा कि टीबी मरीजों के रिकॉर्ड को कंप्यूटराइज्ड किया जाएगा और उन्हें विशेष पहचान संख्या दी जाएगी, जिसे देखकर कैमिस्ट उन्हें सरकार द्वारा मुफ्त दी गई दवाइयां उपलब्ध करा सकेगा।
वर्तमान में टीबी के मरीज आरएनटीसीपी के अंतर्गत चल रही योजना डॉट्स में पंजीकृत हैं। मगर फिर भी बहुत से मरीज निजी डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं, लेकिन वह नियमित रूप से दवा नहीं खा पाते हैं, जिससे यह बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है।
अनुमान के मुताबिक हर साल 20 लाख लोग टीबी के शिकार हो जाते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना के जरिए वह 4 लाख और मरीजों तक अपनी पहुंच बना सकेगी।