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गीता को अपना मुल्क तो मिला मगर अपने नहीं मिले

Mon, 26 Oct 2015 11:26 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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लंबे इंतजार के बाद भारत की बेटी गीता का पाकिस्तान से अपने मुल्क आने का सपना तो पूरा हो गया, मगर उसके परिजनों पर पेच अब भी बरकरार है। दरअसल सोमवार को अपने वतन लौटी गीता ने खुद पर दावा जताने वाले बिहार के सहरसा जिले के महतो परिवार को पहचानने से इनकार कर दिया है।
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हालांकि, दावेदारी की सत्यता परखने के लिए दावेदार परिवार के सदस्यों के साथ-साथ गीता के खून का सैंपल डीएनए टेस्ट के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भेज दिया गया है।

एक सप्ताह में एम्स की रिपोर्ट विदेश मंत्रालय को सौंप दी जाएगी। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रवक्ता के डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि एम्स चिकित्सा अधीक्षक डॉ डीके शर्मा के नेतृत्व में डीएनए टेस्ट के लिए छह डॉक्टरों की एक टीम बनाई गई है।
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जारी रहेगी गीता के परिवार की तलाश

डीएनए टेस्ट में महतो परिवार के दावे की पुष्टि होने पर गीता को इस परिवार के साथ रहने के लिए मनाया जाएगा। पुष्टि न होने की स्थिति में गीता इंदौर स्थित संस्था एआईएएसएलआई में रहेगी।

विदेश मंत्री ने गीता के परिवार की तलाश जारी रखने की घोषणा की है। इससे पहले करीब एक दशक पूर्व राह भटककर पाकिस्तान पहुंची मूकबधिर गीता पीआईए के विमान से उसे संरक्षण देने वाली संस्था ईदी फाउंडेशन के पांच सदस्यों के साथ इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंची। विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। 

पांच राज्यों के परिवारों ने किया था गीता पर दावा

दरअसल गीता पर पांच राज्यों के परिवारों ने दावा जताया था। विदेश मंत्री ने इस मामले में विशेष पहल करते हुए दावेदार परिवारों के सदस्यों के फोटो पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग के माध्यम से गीता तक पहुंचाए थे।

तब गीता ने सहरसा के महतो परिवार के दावे को सही ठहराया था। उस दौरान उसने अपने पिता, सौतेली मां और भाई को पहचाना था। मगर दिल्ली में जब इन्हें गीता के सामने पेश किया गया तो गीता ने इन्हें पहचानने से इनकार कर दिया।

विदेश मंत्री ने कहा कि खुशी की बात यह है कि गीता अपने वतन वापस लौट गई है। डीएनए टेस्ट का नतीजा सकरात्मक न होने की स्थिति में गीता के परिजनों की तलाश लगातार जारी रहेगी।

दावे में पहले ही था झोल
गीता ने हालांकि महतो परिवार के सदस्यों को पहचाना था, मगर परिवार के दावे में कई झोल थे। महतो परिवार गीता को न केवल शादीशुदा बता रहे थे, बल्कि उनका दावा था कि गीता को एक बेटा भी है। जबकि संरक्षक ईदी फाउंडेशन के मुताबिक गीता 6-7 साल के उम्र में ही भटककर पाकिस्तान पहुंची थी।
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हाथ जोड़ने पर समझा हिंदू है गीता

ईदी फाउंडेशन की बिलकिस ईदी के मुताबिक गीता हाथ जोड़ती थी, पांव छूती थी। इशारे से पूजा के लिए घंटी मांगती थी। इससे लगा कि यह पड़ोसी मुल्क की हिंदू है।

शुरुआती दिनों में उसे जिस भी संस्था या केंद्र में रखा गया, वहां से भाग निकलने की कोशिश में लगी रहती थी। अंत में हमने उसे अपने परिवार के साथ रखना शुरू किया।

ईदी फाउंडेशन और पाकिस्तानी हुकुमत का तहे दिल से शुक्रिया। खास तौर से ईदी फाउंडेशन का जिसने गीता के मजहब और खानपान की आदत की भी रक्षा की। गीता को मां का प्यार दिया। फाउंडेशन के एहसान को भारत कभी नहीं भूलेगा।
सुषमा स्वराज, विदेश मंत्री

हमने मानवता का धर्म निभाया। दुख है कि गीता अब हमारे पास नहीं रहेगी, मगर खुशी इस बात की है कि आखिरकार गीता को उसका घर मिल ही गया। सलमान खान ने हमारी कहानी ले ली, मगर गीता को उसका घर मिल गया।
बिलकिस ईदी, ईदी फाउंडेशन

अपने देश लौट कर बहुत खुश हूं। हर दिन एक बार अपने देश, घर परिवार के बारे में सोचती थी। यहां पढ़ाई कर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हूं।
गीता (सांकेतिक भाषा में)
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