केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में यह स्पष्ट किया है कि रिलायंस के साथ किए गए अनुबंध को रद्द नहीं किया जा सकता है।
एक अप्रैल से प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ाने के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा है कि गैस आयात पर से निर्भरता खत्म करने के लिए यह जरूरी है।
प्रधानमंत्री को लिखे गए तेरह पेज के पत्र में गैस के दाम बढ़ाने की जरूरत और विभिन्न चरणों में संबंधित प्रक्रिया के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है।
एक अप्रैल से बढ़ेंगी कीमतें
मोइली ने लिखा है कि उत्पादन साझा अनुबंध (पीएससी) के प्रावधानों के तहत मध्यस्थ न्यायाधिकरण के अधीन मामला होने के कारण सरकार उत्पादन कम होने पर अनुबंध खत्म नहीं कर सकती है।
दूसरी ओर यह दलील भी है कि कीमतों में इजाफा किए बगैर निजी कंपनी आरआईएल और ओएनजीसी के लिए कुछ फील्डों से गैस का उत्पादन घाटे का सौदा साबित होगा।
इससे देश को उच्च कीमत पर गैस आयात करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। फिलहाल ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड कुल 80 फीसदी गैस का उत्पादन करते है। 1 अप्रैल से कीमत बढ़ने का सर्वाधिक लाभ इन्हीं को होगा।
कीमतें बढ़ाने के एवज में दिए तर्क
मोइली ने यह भी कहा है कि अगर गैस के दाम नहीं बढ़ाए गए तो राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा काफी बढ़ जाएगा। वहीं देश की ऊर्जा सुरक्षा भी प्रभावित होगी।
पेट्रोलियम मंत्री का तर्क है कि तेल व गैस क्षेत्र में अन्वेषण और उत्पादन के लिए जब तक बड़े पैमाने पर निवेश और तकनीकी उन्नयन नहीं होगा, घरेलू उत्पादन हमेशा कम ही रहेगा।
इस ओर निवेश बढ़ाने के लिए यह जरूरी है कि भारत में उत्पादकों को प्राकृतिक गैस उत्पादन के लिए वहीं औसत दर उपलब्ध कराई जाए जो कि उत्पादकों को दूसरे देशों में मिल रही है।