दिल्ली के सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या मामले के छह आरोपियों में से एक की ओर से दायर स्थानांतरण याचिका पर दो वकीलों के पेश होने से उपजे मतभेद के चलते सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई को टाल दिया।
सर्वोच्च अदालत ने सेशन जज से कहा है कि आरोपी से पूछकर रिपोर्ट दें कि वह मुकदमे का स्थानांतरण चाहता है या नहीं। साथ ही ट्रायल के दौरान उसकी वकालत कौन वकील करेगा। साथ ही यदि आरोपी मुकेश की ओर से उत्पीड़न की कोई शिकायत की जाए तो उस पर भी विचार किया जाए।
चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष बुधवार सुबह सुनवाई में स्थानांतरण याचिका पर तर्क देने के लिए दो वकील (एमएल शर्मा और बीके आनंद) पेश हुए। इस स्थिति में पीठ ने एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (एओआर) को तलब किया और उसने दोपहर में बताया कि उन्हें दोनों वकीलों के नाम पर कोई आपत्ति नहीं प्राप्त हुई है।
बाद में दोनों ही वकीलों ने आरोपियों से वकालतनामे पर हस्ताक्षर कराने का दावा किया, तो अदालत ने इसकी जांच का फैसला लिया। लिखित आदेश जारी किए जाने के दौरान पीठ से वकील आनंद ने कहा कि आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट में उसे बचाव के लिए नियुक्त किया है।
पीठ ने इसके बाद वकील आनंद को कड़ी फटकार लगाते हुए सेशन जज से सारी संबंधित जानकारी हासिल करने को कहा। हाल ही में आरोपी मुकेश की ओर से एक स्थानांतरण याचिका दायर की गई थी, जिसमें मामला उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थानांतरित किए जाने की मांग की गई है। छह आरोपी हैं, उनमें से एक नाबालिग है।