चाहे मुजफ्फरनगर हो या मुरादाबाद...कचहरी में गोलियां तड़तड़ाने के पीछे मूल वजह थी दुश्मनी। बदले की रंजिश से वेस्ट यूपी की जमीन लगातार लाल हो रही है। मुरादाबाद में अब तक पचास से ज्यादा हत्याएं बदला लेने की नीयत से एक के बाद एक की गई हैं तो पश्चिमी यूपी में यह आंकड़ा पांच सौ के पार चला जाता है।
किसी ने भाई के चिता पर हाथ रखकर हत्यारे को मौत के घाट उतारने की कसम खाई तो किसी ने पिता की। पुलिस दुश्मनी से उपजे इस गैंगवार के खतरे को महसूस तो करती है लेकिन कभी समझौते की कोशिश नहीं करती। मौजूदा दौर में भी तमाम परिवारों में खूनी रंजिश जारी है जो कभी भी बड़े गैंगवार का रूप ले सकती है।
दुश्मनी नंबर एक:
4 मार्च 2013 को छात्र नेता रिंकू चौधरी की हत्या कर दी गई थी। कत्ल के इस मामले में ब्लाक प्रमुख योगेंद्र सिंह उर्फ भूरा का नाम आया उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। 23 फरवरी 2015 को भूरा की कचहरी में हत्या कर दी गई। हत्या भी रिंकू चौधरी के भाई सुमित ने अपने साथियों के साथ मिलकर की। बताते हैं सुमित ने रिंकू की जलती चिता पर बदला लेने की कसम खाई थी। सोमवार को जब उसने हत्या की तो इस बात को कहा भी था।
दुश्मनी नंबर दो:
27 अप्रैल 2011 में डबल फाटक दस सराय में सभासद राजेश सैनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह कत्ल भी वर्चस्व को लेकर हुआ। इस हत्या में यहीं के रहने वाले हिंदू नेता ध्यान सिंह सैनी को भी नामजद किया गया था। 10 अप्रैल 2014 को ध्यान सिंह सैनी को गोली मारी गई और 18 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। इस मामले में राजेश सैनी के भाइयों को नामजद किया गया था। अभी तक दोनों पक्षों में रंजिश चली आ रही है। हालांकि समझौते के प्रयास कई दफा हुए।