भोपाल की एक स्थानीय अदालत ने दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा के भाई शंभू दयाल शर्मा को धोखाधड़ी के एक मामले में 3 साल कैद की सजा सुनाई है।
साथ ही न्यायिक मजिस्ट्रेट वर्षा शर्मा की अदालत ने एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
मामले के अनुसार, शंभू दयाल शर्मा 1995 में यहां जिला कुष्ठ रोग विभाग सतपुड़ा भवन में प्रभारी पद पर कार्यरत थे। पद पर रहते हुए उन्होंने रामसनेही नामक व्यक्ति को रिश्वत लेकर चपरासी के पद पर नियुक्त किया था, जबकि उसने गैर चिकित्सकीय सहायक पद के लिए आवेदन किया था।
हालांकि उसकी योग्यता इस पद के लायक नहीं थे। उन्होंने रामसनेही का वेतन 2000 रुपये तय किया था, लेकिन उसे मात्र 500 रुपये दिए जाते थे। कुछ दिन बाद शंभू दयाल उससे घरेलू काम भी कराने लगे थे।
किसी तरह से रामसनेही को पता चला कि उसका वेतन तो 2000 रुपये है, लेकिन उसे मिलते केवल 500 ही हैं। इसके बाद उसने नौकरी छोड़ दी और इसकी इसकी शिकायत 27 अगस्त 1999 में संबंधित विभाग एवं जिला कलेक्टर से की।
कलेक्टर के निर्देश पर टीटी नगर पुलिस स्टेशन में शंभू दयाल के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और मामला कोर्ट में चला। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सुबूतों के आधार पर कोर्ट ने सजा सुनाई।