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इशरत केस: जुड़ रहे गुजरात की चार फर्जी मुठभेड़ों के तार

Sun, 28 Jul 2013 09:18 AM IST
गुंजन कुमार/नई दिल्ली
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इशरत जहां और उसके तीन साथियों के कथित फर्जी एनकाउंटर की साजिश की पर्तें उधेड़ने में लगी सीबीआई को बिल्कुल नए और सनसनीखेज सुराग मिल रहे हैं।
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एजेंसी को शक है कि इशरत के साथ मारे गए दो कथित पाकिस्तानी आतंकी अमजद अली राणा और जीशान जौहर लश्कर आतंकी नहीं बल्कि अंडरवर्ल्ड से जुड़े थे। इसे पुख्ता करने के सिलसिले में ही सीबीआई ने इन दोनों की असली पहचान के लिए पांच लाख रुपये इनाम की घोषणा की है।

सीबीआई को इशरत एनकाउंटर के साथ एक साल पहले और बाद में हुई दो कथित फर्जी मुठभेड़ों में एकरूपता दिख रही है।

गुजरात के इन मामलों की जांच से जुड़े अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि सादिक जमाल और शोहराबुद्दीन शेख के एनकाउंटर के पीछे की असल वजह अंडरवर्ल्ड है जिन्हें गुजरात मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या का आमादा आतंकी बताकर मारा गया।
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सीबीआई चार्जशीट के मुताबिक सादिक को 12-13 जनवरी, 2003 और शोहराबुद्दीन को 26 नवंबर, 2005 को अगवा कर योजनाबद्ध तरीके से मारा गया। इन दोनों एनकाउंटर के बीच 15 जून, 2004 को इशरत जहां और उनके तीन साथियों को उसी पुलिस की टीम ने अगवा कर मारा।

शोहराबुद्दीन मामले की चार्जशीट के मुताबिक 26 दिसंबर, 2006 को पुलिस ने अंडरवर्ल्ड से जुड़े तुलसी प्रजापति को भी मारा क्योंकि वह शोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी की हत्या का चश्मदीद था।

इन चारों एनकाउंटर की जांच कर रही सीबीआई के मुताबिक सादिक मुंबई में गिरफ्तारी से पहले दुबई में दाऊद इब्राहिम के खास अनीस इब्राहिम के रिश्तेदार के यहां काम करता था।

वहां हुई किसी अनबन की वजह से वह साजिद को मारना चाहते थे लेकिन तब तक वह वापस आ चुका था। इसी तरह शोहराबुद्दीन जबरन वसूली करने वाले अंडरवर्ल्ड के लोगों से सीधे तौर पर जुड़ा था।

सीबीआई में दर्ज एक गवाही के मुताबिक शोहराबुद्दीन को मारने के लिए गुजरात और राजस्थान की मार्बल लाबी ने गुजरात पुलिस के इन अधिकारियों को 10 करोड़ रुपये दिए थे। एजेंसी के उच्च अधिकारी के मुताबिक यह संभव है कि पुलिस का यह गैंग दूसरों के इशारे पर आतंकवाद की आड़ में एनकाउंटर कर रहा हो।

सीबीआई को यह शक पैदा हुआ जब जांच कर रहे अधिकारियों ने इशरत के साथी राणा और जौहर की पहचान पत्र से जुड़े निचली अदालत के फैसले पर गौर किया। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एस पी तवांग ने एजेंसी की ही जांच को रेखांकित किया कि राणा और जौहर के पास से मिले पहचान पत्र फर्जी थे।
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अदालत के मुताबिक यह दोनों स्थानीय ही हैं जिन्हें पुलिस ने पाकिस्तानी बनाने के कोशिश की। सीबीआई की ओर से अब तक अदालत की इस टिप्पणी के संबंध में कोई तथ्य नहीं पेश किया गया है।
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