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नहीं रहे भारतीय न्यायपालिका के 'भीष्म पितामह'

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लीक से हटकर मानवीय पहलुओं को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले करने वाले पूर्व जस्टिस वीआर कृष्णा अय्यर का बृहस्पतिवार तड़के निधन हो गया। वामपंथी विचारधारा वाले जस्टिस अय्यर आपातकाल के दौरान चर्चित हुए थे।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोकसभा चुनावों में इंदिरा गांधी की भारी जीत को अस्वीकार कर दिया था और जस्टिस अय्यर ने इस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके अगले दिन देश में इमरजेंसी लागू हो गई थी।

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एएस आनंद ने उन्हें भारतीय न्यायपालिका का ‘भीष्म पितामह’ भी करार दिया था। वैद्यनाथनपुरा राम कृष्णा अय्यर ने निष्पक्ष फैसलों की वजह से काफी लोकप्रियता हासिल की। उन्होंने दलितों व आम लोगों के पक्ष में काफी काम किया।
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जज के रूप में जमानत की फिर से व्याख्या करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। वह पिछले महीने 13 नवंबर को ही 100 साल के हुए थे। गत 24 नवंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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मानवीय पहलुओं के मद्देनजर लिए कई फैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीटर के जरिए उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा, ‘जस्टिस अय्यर के साथ मेरा जुड़ाव काफी खास है। आज मुझे उनसे की गई बातें याद आ रही हैं। उन्होंने मुझे काफी पत्र भी लिखे।’ माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा, ‘अपने पूरे जीवन में कृष्णा अय्यर न्याय, समानता और समाजवाद के लिए आवाज उठाते रहे।’

1973 में सुप्रीम कोर्ट के जज की जिम्मेदारी संभालने से पहले वह केरल में विधायक, मंत्री और जज भी रह चुके थे। वह 1980 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे। केरल में स्वर्गीय ईएमएस नंबूदरीपाद की वामपंथी सरकार में उन्होंने मंत्रिपद भी संभाला था। यह सरकार लोकतंत्र द्वारा चुनी गई दुनिया की पहली वामपंथी सरकार थी।

1950 के दशक में कानून मंत्री के तहत उनके कार्यकाल के दौरान भूमि सुधार शुरू किए गए थे। 70 के दशक में सात साल तक सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में काम करते हुए सुने जाने के नियमों में ढील देते हुए आम लोगों तक न्यायपालिका की पहुंच बनाई थी।

उन्होंने विचाराधीन कैदियों के लिए जमानत प्रक्रिया की फिर से व्याख्या की थी। पिछले साल उन्होंने नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी, जबकि 2002 के दंगों के लिए वह मोदी के आलोचक रहे हैं।
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