पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने इशरत जहां मामले में सीधे तौर पर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम का नाम लिया है। पिल्लई का दावा है कि चिदंबरम ने गृह मंत्री रहते हुए उस हलफनामे को बदलवा दिया था, जिसमें इशरत के लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े होने की बात कही गई थी। नए हलफनामे में इशरत के आतंकी संगठन से संबंध होने की बात हटा ली गई थी।
पिल्लई ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए साक्षात्कार में बताया है कि गृह मंत्रालय ने अगस्त 2009 में सुप्रीम कोर्ट में ओरिजनल एफिडेविट दाखिल किया था। इसमें आईबी के इनपुट का हवाला देते हुए बताया गया था कि इशरत और उसके तीनों सहयोगी, जावेद शेख उर्फ प्रणेश पिल्लई, जीशान जौहर और अमजद अली राणा लश्कर के स्लीपर सेल का हिस्सा थे।
यह हलफनामा दायर करने के एक महीने बाद तत्कालीन गृह मंत्री चिदंबरम ने संयुक्त सचिव से केस की फाइल अपने पास मंगा ली थी। पिल्लई के अनुसार चिदंबरम ने कहा था कि एफिडेविट में कुछ बदलाव की जरूरत है। केंद्रीय मंत्री के निर्देशानुसार यह बदलाव होने के बाद ही फाइल पिल्लई के पास पहुंची।
सितंबर 2009 में अदालत में जो दूसरा हलफनामा दाखिल किया गया, उसमें मंत्रालय ने कहा था कि आईबी के इनपुट एनकाउंटर में मारे गए लोगों को आतंकी संगठन से जोड़ने के लिए निर्णयात्मक सबूत नहीं थे।
पिल्लई के मुताबिक इशरत और जावेद उत्तर प्रदेश तथा अहमदाबाद में कुछ होटलों में कपल की तरह रुके थे। इशरत जावेद और मॉडयूल के दूसरे लोगों के लिए कवच की तरह थी। वह भी जानती थी कि कुछ गलत हो रहा है।