इसे व्यथा कहें या फिर दुर्भाग्य, देश के मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस एएन रे खुद पर हुए जानलेवा हमले के मामले में इंसाफ का इंतजार करते-करते दुनिया से चल बसे।
लेकिन 39 साल बाद भी 20 मार्च, 1975 को विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के चीफ जस्टिस रे पर सर्वोच्च अदालत के करीब हुए घातक हमले का मुकदमा अब तक लंबित है।
राष्ट्र की न्यायपालिका सवा तीन करोड़ लंबित मामलों का पहाड़ चढ़ रही है और लोग न्याय मिलने में बरसों की देरी की भेंट चढ़ रहे हैं।
देश की जर्जर न्याय व्यवस्था की हकीकत का सबसे बड़ा उदाहरण जब खुद भारत का पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) हो, तो ऐसे में इंसाफ के लिए जूझते आम आदमी के दुर्दिनों के बारे में तो पूछिए ही मत।
सुप्रीम कोर्ट जता चुका है देरी पर नाराजगी
निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च अदालत तक लंबित मामलों की फेहरिस्त से जूझ रही हैं। वहीं केंद्र और राज्य सरकारें इस गंभीर चुनौती पर एक दूसरे को कोस रही हैं।
पूर्व सीजेआई जस्टिस रे की मौत 25 दिसंबर, 2010 को हुई, तब उन पर हुए जानलेवा हमले का मामला दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित था और आज भी है।
सर्वोच्च अदालत भी दो साल पहले पूर्व सीजेआई के मामले में 37 साल की लंबी देरी को लेकर गहरी नाराजगी जता चुका है। लेकिन हाईकोर्ट में लटकी आरोपियों की अपील अब तक नतीजे के इंतजार में है।
जस्टिस रे पर हुए हमले मामले पर अतिरिक्त सेशन जज ने एक साल कुछ महीनों में सुनवाई पूरी कर 28 अक्तूबर, 1976 को फैसला दे दिया था, जिसमें आरोपियों को दोषी करार देकर सजा सुनाई गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट में दायर हुई आरोपियों की अपील पर चली सुनवाई 37 साल का इतिहास बना चुकी है।
कानून मंत्री बदले, पर नहीं बदला भाग्य
हाईकोर्ट ने गत वर्ष नवंबर में जस्टिस रे और उनके बेटे, ड्राइवर व एक अन्य कर्मचारी पर कार में बम फेंककर हुए हमले के मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया था। लेकिन अभी फैसला नहीं आया है और इसके बाद इंसाफ के सर्वोच्च मंदिर में लगने वाला समय भी बाकी है।
इस हमले में फेंके गए बम नहीं फटे थे, लेकिन हमला सुनियोजित था। याद रहे कि शीर्षस्थ अदालत ने दो साल पहले हाईकोर्ट से कहा था कि इस मामले का जल्द से जल्द निपटारा करे।
गौरतलब है कि यूपीए-2 सरकार ने सत्ता में आते ही पांच साल में देश की न्याय व्यवस्था को सुधारने का दावा किया था। लेकिन सरकार का पूरा कार्यकाल बीतने की कगार पर है और न्यायपालिका में लंबित मामलों की हालत जस की तस है।
केंद्र की यूपीए-2 में कानून मंत्री बदलते रहे, पर नहीं बदला तो अदालत की चौखट पर भटकने वालों का भाग्य। जो रोजाना अदालत से तारीख और सिर्फ तारीख लेकर जाते हैं।
'जल्द न्याय के लिए राज्यों को कोष देगा केंद्र'
पूर्व सीजेआई जस्टिस एएन रे के लंबित मामले पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी न करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकारें धन न होने का हवाला देकर जजों की नियुक्ति और ढांचागत सुविधाओं में देरी करती रही हैं। इसी वजह से हाल ही में जनता को जल्द न्याय मुहैया कराने के लिए केंद्र ने तय किया है कि वह राज्यों को इसके लिए कोष मुहैया कराएगी।
कानून मंत्री ने कहा कि हाल ही में देश की सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिसों से इस मसले पर बैठक हुई थी। राज्य सरकारों की ओर से न्यायिक व्यवस्था को सुधारने के लिए धन की कमी के बारे में कई बार कहा गया है। ऐसे में उपचार के लिए वित्त मंत्रालय से सिफारिश की गई है और जल्द ही अदालतों में जजों की नियुक्ति, ढांचागत सुविधाओं व अन्य के लिए राज्यों को कोष मुहैया कराया जाएगा।