आज हिंदी दिवस है। इस मौके पर वर्तमान में हिंदी की स्थिति को लेकर बीबीसी के भारत में पूर्व ब्यूरो चीफ मार्क टुली से अमर उजाला ने खास बात की।
इसमें मार्क टुली ने हिंदी को लेकर अपने निजी अनुभवों को साझा किया। इस दौरान जब उनसे वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में हिंदी की स्थिति पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ये दुख की बात है कि वर्तमान में हिंदी माध्यम के विद्यालयों की जगह लोग अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में भेज रहे हैं। इसके पीछे उनकी सोच होती है कि अंग्रेजी सीखने से उनके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा। लेकिन असल में ऐसा नहीं होता।
मार्क टुली के मुताबिक लोग सोचते हैं कि हिंदी की अपेक्षा अंग्रेजी सीखने से उनके बच्चे बड़े अधिकारी बन सकते हैं। लेकिन अंग्रेजी माध्यम के अच्छे विद्यालय नहीं मिलने से कई बार बच्चे अच्छी अंग्रेजी तो दूर अच्छी हिंदी भी नहीं सीख पाते हैं। ऐसे में उन्हें इसका खामियाजा उठाना पड़ता है।
मार्क टुली से जब हमने पूछा कि उन्हें हिंदी कैसी लगती है तो उन्होंने बताया कि उन्हें हिंदी बहुत पसंद है। मैं हिंदी में बात करना चाहता हूं लेकिन लोग उसे समझ नहीं पाते हैं। लेकिन आपने मुझसे हिंदी में बात की ये मेरे लिए बेहद खास है।
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