जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार गठन के लिए भाजपा किसी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। पार्टी पर संघ का दबाव भी बढ़ा है, जिसने नीतियों को ताक पर नहीं रखने की नसीहत दी है। दूसरी ओर पूर्व उप मुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग और पूर्व वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू के अघोषित टकराव में पीडीपी की नीतियां उलझ गईं हैं।
भाजपा के साथ गठबंधन में द्राबू ने अहम भूमिका निभाई थी। द्राबू अब भी भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने के पक्ष में हैं लेकिन बदली परिस्थितियों में हाशिए पर पड़े बेग का महत्व बढ़ जाने के बाद पीडीपी के स्टैंड में भी बदलाव दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक संघ ने भाजपा नेतृत्व से कहा है कि तात्कालिक फायदे के लिए दीर्घकालिक नुकसान उठाना ठीक नहीं होगा।
पिछली बार सरकार गठन के लिए अनुच्छेद 370 का मुद्दा ठंडे बस्ते में डाला गया था। भाजपा को गठबंधन एजेंडे पर नए सिरे से प्रतिबद्धता जाहिर करने से गुरेज नहीं है लेकिन नई शर्तें नहीं मानने की सियासी विवशता भी है। अलगाववादियों के प्रति नरम रुख भाजपा को उत्तर प्रदेश के चुनाव में नुकसान पहुंचा सकता है। नतीजतन विश्वास बहाली के उपायों के तहत पीडीपी को केंद्र सरकार से जिस तरह की पहल की उम्मीद है, वह संभव नहीं दिखता।