तमिलनाडु के कई डॉक्टरों, सर्जन और कई संगठनों को एक खास तरह का निवेदन आ रहे हैं और वो निवेदन यह है कि एक मां अपने शरीर के अंगों को निकाल कर उसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेचना चाहती है ताकि उसके बच्चे को पढ़ाने के लिए रुपयों का इंतजाम हो सके।
चेन्नई के ट्रांसप्लांट सर्जन्स को एक ई-मेल आई है जिसमें लिखा है कि 'मैं अपनी किडनी बेचना चाहती हूं। मैं 37 वर्षीय शादी शुदा महिला हूं। मेरे पास मेरे बच्चे को पढ़ाने के लिए पैसे नहीं हैं और मेरे साथ अन्य घरेलू दिक्कतें भी हैं। क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं?'
ई-मेल में यह भी लिखा है कि 'यह बहुत आवश्यक है और मेरा ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव है'। बताते चलें कि 1994 मानव अंग अधिनियम और प्रत्यारोपण के नियमों के मुताबिक यदि कोई भी शरीर के अंगों को बेचते या खरीदते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर 20,000 हजार रुपए का जुर्माना होता है।
एक नया ट्रेंड
अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर मां बाप इतने ज्यादा हताश हो जाते हैं कि एडमिशन के टाईम में ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। डॉक्टर सुनील श्राफ के मुताबकि ई-मेल भेजना एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है।
ये लोग न तो बहुत ज्यादा गरीब होते हैं और न ही निरक्षर। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा के बहुत ज्यादा महंगे होने की वजह से लोगों को यह कदम उठाना पड़ता है। डॉक्टर श्राफ अंग दान के लिए एक गैर सरकारी संस्था की मदद से कैंपेन भी चलाते हैं।
उन्होंने कई बार ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिसमें लोग अपनी बेटी की शादी करने या फिर उधार चुकता करने के लिए भी ऐसे कदम उठाते हैं।
हम करते हैं उनकी काउंसलिंग
डॉक्टर श्राफ का कहना है कि एडमिशन के समय तो ऐसे ई-मेल्स आते ही रहते हैं लेकिन इसके बाद भी ऐसे संदेशों का आना कम नहीं होता। डॉक्टर श्राफ कहते हैं कि उनके पास कई ऐसे मेल आए हैं जिनमें लोग अपने जिसमें लोग अपना नंबर भी देते हैं और लिखते हैं कि मेरी पारिवारिक हालत सही नहीं है इसलिए मैं अपना अंग बेचना चाहता हूं।
ट्रांसप्लांट सर्जन विशेषज्ञों को इस बात का डर है कि अगर ये लोग अंग बेचने के लिए किसी बिचौलिए का सहारा लेने लगे तो स्थिति बहुत खराब हो सकती है। राज्य प्रत्यारोपण रजिस्ट्री के मुताबिक उनके पास ऐसे ई-मेल्स दो दिन में एक बार जरुर आते हैं।
राज्य शव प्रत्यारोपण प्राधिकार में डॉक्टर जे अमलोपवंथन के मुताबिक इस संबंध में जो भी ई-मेल आती हैं वो उन लोगों को फोन कर के उनकी काउंसलिंग करते हैं और उन्हें यह भी समझाया जाता है कि यह कानूनी रुप से मान्य नहीं हैं।