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लोकसभा में पेश नहीं हो पाया फूड सिक्योरिटी बिल

Fri, 22 Mar 2013 04:39 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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देश की दो-तिहाई आबादी को सस्ते अनाज का कानूनी हक दिलाने वाला खाद्य सुरक्षा विधेयक (फूड सिक्योरिटी बिल) शुक्रवार को लोकसभा में पेश नहीं हो पाया। लोकसभा अब 22 अप्रैल तक के लिए स्थगित हो गई है।
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हालांकि सरकार की मंशा थी कि इस विधेयक को बजट सत्र में ही पास करा लिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। शुक्रवार को बजट सत्र का आखिरी दिन था। इससे पहले केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को इस बिल को अपनी मंजूरी दे दी थी।

फूड सिक्योरिटी बिल में दो-तिहाई आबादी के हर व्यक्ति को हर माह पांच किलोग्राम अनाज 1 से 3 रुपये प्रति किलो की सस्ती दर पर मुहैया कराने का प्रस्ताव है। वहीं, अन्न अंत्योदय योजना के तहत आने वाले बेहद गरीब 2.43 करोड़ परिवारों को हर माह 35 किलो अनाज पाने का कानूनी अधिकार होगा।
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केंद्रीय खाद्य मंत्री केवी थॉमस के मुताबिक इस कानून के अमल में आने के बाद खाद्य सब्सिडी का बोझ 20 हजार करोड़ रुपये और बढ़ जाएगा, जबकि 612.3 लाख टन अनाज की जरूरत होगी।

कानून के तहत सभी लाभार्थियों को समान दामों पर अनाज मिलेगा, जिसमें चावल 3 रुपये किलो, गेहूं 2 रुपये किलो और मोटा अनाज 1 रुपये किलो मिलेगा। कानून लागू होने के तीन साल बाद दामों की समीक्षा की जाएगी।

क्या है विधेयक में
देश की दो-तिहाई आबादी को एक से तीन रुपये प्रति किलोग्राम की सस्ती दरों पर प्रति व्यक्ति एक समान पांच किलोग्राम खाद्यान्न उपलब्ध कराना।

योजना के तहत चावल 3 रुपये प्रति किलो, गेहूं 2 रुपये प्रति किलो और मोटा अनाज 1 रुपये प्रति किलो मिलेगा।
अंत्योदय अन्न योजना के तहत आने वाले करीब 2.43 करोड़ बेहद गरीब परिवारों को प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न की कानूनी अर्हता होगी।

इन परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिये यह खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा।

तीन साल तक सरकार दाम में किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकेगी। इसके बाद ही दाम की समीक्षा की जा सकेगी।

केंद्र सरकार की तरफ  से तय किए गए मापदंडों के आधार पर राज्य सरकारें लाभार्थियों की सूची बनाएंगी, इत्यादि।

लाभार्थी
दो भागों में बांटा गया है।

पहलाः प्रायोरिटी यानी प्राथमिक हाउसहोल्ड (बीपीएल) - गरीबी रेखा से नीचे
दूसराः जनरल यानी सामान्य हाउसहोल्ड (एपीएल) - गरीबी रेखा से ऊपर

दायरा
इसके दायरे में देश के करीब 63.5 प्रतिशत आबादी आ जाएगी।

75 फीसदी ग्रामीणों को इस कानून के दायरे में लाने की बात कही गई है इनमें से 46 फीसदी बीपीएल के होंगे।

50 फीसदी शहरी लोग इस कानून के दायरे में आएंगे जिसमें से 28 फीसदी बीपीएल कैटेगरी के तहत होंगे।

बेसहारा, बेघर, भूखमरी से त्रस्त भी इसका लाभ उठा सकेगा।
नवजात बच्चों की मां को छह माह तक एक हाजर रुपये अतिरिक्त मदद भी मिलेगी। (इसके अंतर्गत करीब 2.25 करोड़ महिलाएं आ जाएंगी।)

सरकार पर बोझ
विधेयक के कानून में बदल जाने के बाद अनाज की मांग 5.5 करोड़ मिट्रिक टन से बढ़ कर 6.1 मिट्रिक टन हो जाएगी।

पूरी योजना लागू करने में 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपयों का खर्च आएगा।

टाइमलाइन
वर्ष 2009 में आम चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खाद्य सुरक्षा का वादा किया था।
दिसंबर 2011: विधेयक को संसद में पेश किया गया था। जिसमें प्रति व्यक्ति 7 किलो अनाज दिए जाने का प्रावधान किया गया था। बाद में इसे संसदीय स्थाई समिति के पास भेजा गया जिसने 5 किलो अनाज देने की सिफारिश की।
जनवरी 2012: स्टैंडिंग कमिटी के पास विचार के लिए भेजा गया।
19 मार्च, 2013: केंद्रीय कैबिनेट ने संशोधित विधेयक को मंजूरी प्रदान की।

मौजूदा समय में
मौजूदा सार्वजनिक वितरण (पीडीएस) प्रणाली के तहत बीपीएल और एएवाई परिवारों को प्रति माह 35 किग्रा अनाज मिलता है, जबकि एपीएल परिवारों को आवंटन 15 से 35 किग्रा के बीच होता है।

मौजूदा समय में चावल की आपूर्ति एएवाई परिवारों को तीन रुपए प्रति किग्रा की दर से, बीपीएल परिवारों को 5.65 रुपए प्रति किग्रा की दर से तथा एपीएल परिवारों को 8.30 रुपए प्रति किग्रा की दर से की जाती है।

गेहूं की बिक्री एएवाई परिवारों को दो एपये प्रति किग्रा की दर से, बीपीएल परिवारों को 4.15 रुपए प्रति किग्रा की दर से तथा एपीएल परिवारों को 6.10 रुपए प्रति किग्रा की दर से की जाती है।
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