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पांच बच्चों के सामने था खाने का संकट, मां ने खुद को लगाई आग

Mon, 07 Sep 2015 02:10 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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जब पूरा देश रक्षाबंधन की खुशियों में मशगूल था, उसी दिन महाराष्ट्र के उस्मानाबाद के अंबी गांव में एक मां जो अपने पांच बच्चों को भोजन दे पाने में असमर्थ थी और उसने खुद को आग लगा ली।
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इन दिनों महाराष्ट्र का मराठवाड़़ सूखे की मार झेल रहा है। 40 वर्षीय मनीषा गटकल ने खुद को तब आग लगा ली जब पति लक्ष्मण काम करने बाहर गए हुए थे।

मनीषा ने खुद को कमरे में बंद कर के केरोसिन तेल डाल कर खुद को आग लगा ली। मनीषा के पति लक्ष्मण के मुताबिक उनके घर में खाने को कुछ नहीं है। घर में केवल खाली बर्तन हैं।

यह गांव उस्मानाबाद और सोलापुर के बीच बसा है और लोग बताते हैं कि यहां हालात बद् से बद्तर हो चुके हैं। यहां लोगों को नरेगा के तहत भी काम नहीं मिलता।
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नरेगा के तहत नहीं मिला काम

लक्ष्मण के मुताबकि हम बहुत गरीब हैं और घर में खाने को कुछ नहीं था। मेरे पास भी कोई काम नहीं था, और जब काम मिला तो मैं बाहर काम करने चला गया लेकिन इसी दौरान ये घटना हुई।

आस-पास के लोगों ने बताया कि राशन के नाम पर सिर्फ 18 किलो गेहूं, 12 किलो चावल मिलता है। जो 7 लोगों के परिवार के लिए कम है। लोगों ने यह भी बताया कि यहां नरेगा के तहत काम भी नहीं मिलता।

लक्ष्मण के भाई बाला साहब ने कहा कि अगर नरेगा तहत काम मिल जाता तो लक्ष्मण के पास कुछ पैसे भी होते लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इसका परिवार बिखर गया।

बताते चले कि मराठवाड़ा में बीते 3 साल से सूखा पड़ रहा है और इस बारिश के मौसम में भी यहां सबसे कम बारिश हुई। आंकड़े बताते हैं कि साल 2014 में 574 किसानों ने खुदकुशी की थी वहीं 2015 में अब तक 628 किसानों ने आत्महत्या की है।
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