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भारत, इजरायल से सीखे कैसे करें सरहद की सुरक्षा

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पंजाब के पठानकोट में हुए आतंकी हमले के बाद एक बार फिर से भारतीय सीमाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर सुरक्षा को लेकर ऐसा क्या किया जाए जिससे ऐसे आतंकी हमलों से बचा जा सके, इसको लेकर सुरक्षा एजेंसियों में माथापच्ची का दौर जारी है।
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सीमा सुरक्षा की बात की जाए तो इसका शानदार उदाहरण इजरायल में देखने को मिलता है। जिसने फिलीस्तीन से लगी अपनी सीमाओं की सुरक्षा को इसकदर हाईटेक किया है कि कोई भी दुश्मन उनकी जमीन पर प्रवेश के बारे में सोच भी नहीं सकता।

इजरायल की इसी खूबी को समझने के लिए ही खुद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने एक साल पहले वहां का दौरा किया था। इस दौरान राजनाथ ने गाजा सीमा पर लगे हाईटेक सुरक्षा तंत्र को समझने की कोशिश की थी। उन्होंने ये भी जाना कि कैसे इजरायल ने फिलीस्तीन की ओर से होने वाली घुसपैठ पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई।
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पिछले साल राजनाथ सिंह ने किया था इजरायल का दौरा

राजनाथ सिंह के इजरायल दौरे से आने के बाद ये माना जा रहा था कि सीमा सुरक्षा को लेकर कुछ बदलाव किया जाएगा। लेकिन पठानकोट हमले से साबित हो गया कि राजनाथ सिंह के इजरायल दौरे का कोई खास फायदा देश को नहीं हुआ।

बीएसएफ की ओर से सीमा सुरक्षा के लिए लगाई गई इम्प्रोवाइज्ड रिकॉर्डिंग डिवाइस का फ्लैप झुकने से कैमरा तो चलता रहा लेकिन उसमें कोई रिकॉर्डिंग नहीं हो सकी। जिससे आतंकियों की एंट्री का कुछ पता हमारे सुरक्षा जवानों को नहीं मिली।

दूसरी ओर बीएसएफ की ओर से अलार्म तकनीक को भी अपनाया गया, साथ ही लेजर वॉल का भी इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है। लेकिन अब तक इसने पूरी तरह से काम करना शुरू नहीं किया है। लेजर वॉल अभी तक लगाई नहीं गई है।

जम्मू की सीमा पर इसे सबसे पहले लगाने की योजना है। सवाल ये भी उठ रहा है कि आखिर भारत ने अब तक टॉप ऑफ द लाइन सर्विलांस से जुड़ी तकनीक की खरीद क्यों नहीं की? उसकी जगह लोकल तकनीक के जरिए आतंक पर लगाम की कवायद कर रहा है।

अलर्ट के बाद भी हुआ आतंकी हमला

सुरक्षा खामियों का उदाहरण इस बार तब देखने को मिला जब 25 दिसंबर को पहली बार पीएम मोदी ने अचानक लाहौर का दौरा किया था।

इस दौरान बीएसएफ को ऐसे अलर्ट दिए गए थे कि ऐसा आतंकी हमला हो सकता है। इसके बाद भी आतंकी भारतीय सरजमीं पर घुसने में कामयाब हो गए।

विवाद का विषय यह भी है कि बीएसएफ के जवानों ने 553 किमी के पंजाब बॉर्डर को घेर रखा है। इसके बाद भी बामियाल में मौजूद सुरक्षा रहित जलीय सीमा में आतंकी सेंध लगाने में सफल रहे।

भारतीय एयरफोर्स पर 25 किमी. के पठानकोट एयरबेस की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी बावजूद इसके आतंकी इसमें घुसने में सफल रहे। ये कहीं न कहीं हमारी सुरक्षा तंत्र की विफलता ही है।
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गृहमंत्रालय बना रहा सीमा सुरक्षा पर खास योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने पठानकोट दौरे के दौरान सुरक्षा में लगी इस सेंध को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर हम विद्युत सुरक्षा तकनीक का इस्तेमाल हम क्यों नहीं कर रहे हैं?

फिलहाल बीएसएस ने अपनी क्षमता बढ़ाने पर विचार शुरू किया है। कुल मिलाकर हमारी सीमा की सुरक्षा तंत्र का ज्यादा हिस्सा हमारे सुरक्षा बलों के हाथों में है जबकि इजरायल ने पूरी तरह से विश्वस्तर की सुरक्षा तकनीक को अपनाया है।

इसमें कैमरा और ऑब्जर्वेशन सिस्टम को खास तवज्जो दी गई है। जिससे वहां ऐसी घटनाएं पूरी तरह से बंद हो गई है। अब भारतीय गृह मंत्रालय भी ऐसी तकनीक को सीमा पर लागू करने पर विचार कर रहा है। लेकिन जमीन पर ये कब नजर आएगा देखना दिलचस्प होगा?
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