बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने बहुमत सिद्घ करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया। मांझी के इस्तीफा दिए जाने के बाद ही शुक्रवार को बिहार के राज्यपाल ने नीतीश कुमार को सरकार बनाने का न्योता भी दे दिया। नीतीश कुमार अब 22 फरवरी को दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
विधानसभा की बैठक से पहले उन्होंने राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें इस्तीफा सौंप दिया। मांझी के इस्तीफे से भाजपा को झटका लगा है, हालांकि जदयू में जश्न का माहौल है। इसके बाद राज्यपाल ने नीतीश को सरकार बनाने का न्यौता दे दिया। राज्यपाल ने उन्हें बहुमत साबित करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।
सारे घटनाक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि वह निर्धारित 16 मार्च से पहले ही बहुमत साबित कर देंगे। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए इस्तीफा देने के लिए बिहार की जनता से माफी भी मांगी। उन्होंने कहा वह दोबारा लोगों को विकास की सौगात देंगे।
लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश ने ही इस्तीफा देकर जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। हालांकि बतौर मुख्यमंत्री मांझी ने कई ऐसे फैसले लिए और बयान दिए, जिससे जदयू नाराज हो गई। मांझी और नीतीश के रिश्ते भी तल्ख होते गए।
कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ने के बाद जदयू ने मांझी को हटाकर नीतीश को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया। हालांकि मांझी ने इस्तीफा देने से मना कर दिया, जिसके बाद बिहार की सियासत उलझती चली गई।
भाजपा ने किया था समर्थन का ऐलान
इस्तीफे से इनकार के बाद जदयू ने मांझी को पार्टी से बाहर कर दिया। मांझी समर्थक विधायकों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। नीतीश ने राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात कर सरकार बनाने की पेशकश की, हालांकि राज्यपाल ने मांझी को बहुमत सिद्घ करने के लिए 20 फरवरी तक का मौका दिया था।
मांझी ने बहुमत जुटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। भाजपा ने गुरुवार को मांझी का विधानसभा में समर्थन करने की घोषणा की थी।
विधानसभा का गणित: 243 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 233 सदस्य हैं, ऐसे में जादुई आंकड़े के लिए 117 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी। जदयू के पास स्पीकर समेत 110 विधायक हैं। राजद के 24 विधायक हैं। कांग्रेस के 5 और भाकपा का एक विधायक है।
नीतीश कुमार ने भाजपा पर बोला हमला
मांझी के इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने कहा है कि बजट सत्र से पहले ये फैसला हो जाना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि जदयू शुरु से ही यह कह रही थी कि बजट सत्र से पहले सरकार पर फैसला हो जाना चाहिए था। राज्यपाल के अभिभाषण से पहले ऐसा नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बीजेपी के गेमप्लान की पोल खुल गई है।
भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि मांझी का इस्तीफा जदयू का आंतरिक मामला है। भाजपा का इससे कोई लेनादेना नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा न्याय के साथ खड़ी रही है, हमने महादलित समाज के एक व्यक्ति का साथ दिया और अपनी जिम्मेदारी निभाई।
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि मांझी को नई सरकार बनने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए।
मांझी बोले, विधायकों को मिल रही थी धमकी
इस्तीफे के बाद हुई अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस में मांझी ने कहा कि आज हमें विधानसभा का जो सीटींग प्लान दिया गया उसमें हमारे विधायकों का नाम नहीं था। मुख्यमंत्री को चीफ व्हिप रखने का अधिकार है, लेकिन उसे वह अधिकार नहीं दिया गया। नेता प्रतिपक्ष के रूप में नंदकिशोर को भी मान्यता नहीं दी गई। मांझी ने कहा कि ऐसे फैसले से हमें विधानभा अध्यक्ष की नीयत पर शक हुआ।
मांझी ने कहा कि हमारे विधायकों को जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने कहा कि हमने विधानसभा में गुप्त मतदान की इजाजत मांगी थी, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने हमारी बात नहीं सुनी। ऐसी बातों को देखते हुए हमने राज्यपाल से कहा कि विधानसभा में माहौल खराब होने की आशंका है, इसलिए हम इस्तीफा दे रहे हैं।
मांझी ने कहा कि हमारे पास आज भी बहुमत है, लेकिन विधासभा अध्यक्ष के आचरण पर हमें भरोसा नहीं है। मांझी ने कहा कि राज्यपाल के विवेक पर है कि वे जिसे चाहें सरकार बनाने का मौका दें।
'द्रौपदी का चीरहरण होता रहा..'
जीतनराम मांझी ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए एक भी फैसला खुद नहीं लिया। तबादले या पोस्टिंग की जो सूची दी गई, उस पर दस्तखत कर दिया। जो भी कागज भेजा गया, उसे देखा भी नहीं और दस्तखत कर दिया।
उन्होंने कहा मुझे इससे घुटन होने लगी। मैंने सोचा कि मैं अपने विवेक से काम करूंगा, लेकिन नीतीश के आसपास के लोगों को इससे दिक्कत होने लगी। उन्होंने मुझे हटाने की कोशिश की।
मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार के लिए मेरे हृदय में सम्मान है। लेकिन मुझे गालियां दी जाती रही और वे सुनते रहे। द्रौपदी का चीरहरण होता रहा और वे भिष्म पितामह बने रहे। मांझी ने कहा कि मुझे मौका मिला और मैंने हर तबके लिए काम किया।
बिहार विधानसभा स्थगित की गई
खबर आ रही है कि नीतीश कुमार सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि मांझी ने बहुमत का नंबर ना होने पर इस्तीफा दिया है।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के इशारे में बिहार में सियासी ड्रामे की पटकथा लिखी गई। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। नीतीश ने राज्यपाल से मुलाकात के लिए वक्त मांगा है।
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि मांझी को नई सरकार बनने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए। उन्होंने मांझी को सलाह दी है कि वे भाजपा में जाने के बजाय नीतीश कुमार के पास वापस चले जाएं। बिहार की विधानसभा अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई है।
नीतीश बोले भाजपा ने जेडी-यू को तोड़ने की कोशिश की
बिहार में उपजे राजनीतिक संकट के बीच शुक्रवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए जेडी-यू नेता नीतीश कुमार ने कहा कि भाजपा जेडी-यू को तोड़ने की कोशिश कर रही थी, सारा ड्रामा बीजेपी ने रचा है और वो सत्ता की भूखी है। उन्होंने कहा कि भाजपा उनका मोर्चा बनने के बाद से डरी हुई है।
उन्होंने कहा, "हम राज्यपाल के न्यौते का इंतजार कर रहे हैं। हम आठ फरवरी को ही सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके हैं। हम बिहार की जनता की खिदमत करेंगे। मैं पूरी बिहार की जनता से माफी मांगता हूं कि मैं भावना में बहकर कोई काम नहीं करूंगा। बिहार विधानसभा में बहुमत हमारे साथ में है अच्छा होता मांझी जी पार्टी की फैसले का सम्मान करते। मांझी जी को पार्टी ने इतना कुछ दिया। मांझी को ऐसा नहीं करना चाहिए था। महादलित का कार्ड नहीं खेलना चाहिए था, यह मेरा ही दिया हुआ था।मांझी जुगाड़ तकनीक से सरकार बचाना चाहते थे। नैतिक रूप से उन्हें पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था।"
नीतीश ने जातीय कार्ड पर टिप्पणी करते हुए कहा, "कोई किसी पद पर बैठता है तो उसकी कोई जातीय पहचान नहीं होती है। भाजपा वाले हमेशा कहते हैं कि महादलित पीएम। उनका सारा खेल उजागर हो गया है।"