प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने मोतियाबिंद ऑपरेशन कैंप में मरीजों की आंखों की रोशनी जाने के मामले में रविवार को सीएमओ से रिपोर्ट तलब कर ली। आगरा के बाद मथुरा में भी इस कैंप में रोशनी गंवाने वाले पांच मरीज सामने आए हैं। जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए एक टीम बनाई है। देर शाम संस्था बांके बिहारी नेत्र चिकित्सालय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई।
अमर उजाला ने रविवार के अंक में खबर प्रकाशित होने के बाद लखनऊ से लेकर मथुरा तक हड़कंप मच गया। सीएमओ डॉ. बीएस यादव और सिटी मजिस्ट्रेट हेम सिंह के नेतृत्व में डीएम द्वारा बनाई गई टीम ने दिन भर मामले की जांच की। मथुरा में जानकारी करने करने के बाद यह टीम बलदेव में पीड़ितों से मिलने पहुंची और उनके बयान लिए। टीम चंद्रपुरी स्थित संस्था के कार्यालय पर पहुंची तो यहां सड़क पर लगा बोर्ड तक नहीं मिला। शनिवार रात तक बोर्ड यहां लगा था। लोगों ने सीएमओ और सिटी मजिस्ट्रेट को बताया कि एक माह से संस्था का कार्यालय नहीं खुल रहा है। कुछ दिन पूर्व संस्था के लोग सामान भी निकालकर ले गए।
नगर मजिस्ट्रेट देर शाम बलदेव के गांव हबीवपुर पहुंचे। हबीबपुर निवासी रामलली (70), नेकसिया (65), रिसाल सिंह (75) के परिजनों ने बताया कि ऑपरेशन के अगले ही दिन से उन्हें दिखाई नहीं दे रहा है। रविवार देर शाम टीम ने पास के ही गांव नगला कल्लू में दो और महिलाओं सलीमन व भगवान देई को खोज निकाला। इनकी आंखों की रोशनी भी इसी कैंप में गई।
हबीबपुर के ग्रामीणों ने बताया कि आंखों के आपरेशन के लिए गांव के ही एक झोलाछाप के यहां 250 रुपये की पर्ची काटी गई थी। मालूम हो कि 22 नवंबर को चंद्रपुरी धौलीप्याऊ स्थित बांकेबिहारी नेत्र चिकित्सालय संस्था के शिविर में ऑपरेशन किया गया था।
मथुरा के जिलाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि अमर उजाला में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए प्रारंभिक जांच के बाद संस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। संस्था के साथ-साथ ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बांके बिहारी नेत्र चिकित्सालय अध्यक्ष लोकेंद्र गौतम ने कहा कि पंजाब की घटना के बाद एक व्यक्ति लगातार धमकी देकर रुपये मांग रहा था। इसकी रिकार्डिंग भी है। संस्था का इस मामले में कुसूर नहीं है।