गुजरात में 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगा मामले में बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी को मिली बड़ी राहत से पार्टी के हौसले काफी बुलंद हैं। वहीं एक युवती की जासूसी मामले में केंद्र सरकार की ओर से जांच आयोग बिठाकर चुनावों से पहले कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है।
गुजरात दंगों के मामले में कोर्ट की ओर से मोदी को क्लीन चिट मिलने के फैसले से जहां कांग्रेस नेताओं में निराशा है वहीं, पार्टी में अंदरखाने से यह आवाज भी सुनाई दे रही है कि चुनावों से ठीक पहले मोदी की चौतरफा घेरेबंदी कहीं उल्टे पार्टी के गले ही हड्डी न बन जाए।
मगर, गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी को मिली बड़ी राहत और क्लीन चिट को भारतीय जनता पार्टी जोरदार तरीके से भुनाने को तैयार दिख रही है। हम आपको बता रहे है कोर्ट के इस फैसले से मोदी और भाजपा को होने वाले पांच बड़े फायदों के बारे में...
मोदी के विरोधी होंगे हताश!
अहमदाबाद मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई क्लीन चिट के खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका खारिज करने का मतलब यह माना जा रहा है कि मोदी पर अब दंगे का केस नहीं चलेगा।
इसी के साथ जहां गुजरात दंगों को लेकर नरेन्द्र मोदी पर लगे आरोपों का गुबार फुस हो गया है वहीं, दंगों को लेकर हमेशा मोदी को घेरने वाले विरोधियों के मुंह पर तमाचा भी लगा है। इस फैसले से सबसे ज्यादा निराशा कांग्रेस नेताओं को हुई है।
लोकसभा चुनाव के लिए मिला बड़ा हथियार
कोर्ट के फैसले को पार्टी ने ‘सत्य की जीत’ करार देते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके मित्र एनजीओ 11 वर्षों से मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे थे लेकिन अदालत के इस फैसले से नरेन्द्र मोदी और मजबूत बनकर उभरे हैं।
इस फैसले से कांग्रेस द्वारा अल्पसंख्यकों को गुजरात दंगों के नाम पर मोदी के खिलाफ खड़ा करने का पैंतरा भी बेजान होता नजर आ रहा है। इस फैसले से मोदी के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं होने के दावे को भी मजबूती मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि गुजरात दंगों के बाद से ही मोदी को राजनीतिक दल और सामाजिक संस्थाएं लगातार निशाना बना रहीं थीं। लेकिन अब, जब कोर्ट ने मोदी को पाक-साफ बता दिया है तो मोदी के लिए 2014 के लोकसभा चुनाव में एक और बड़ा हथियार मिल गया है।
मुस्लिमों की नफरत होगी कम?
गुजरात दंगों को लेकर मुस्लिमों के दिल में जो नरेंद्र मोदी के प्रति नफरत है उसे कम करने में अब पार्टी को ज्यादा आसानी होगी।
2002 के साम्प्रदायिक दंगों की जांच को लेकर गठित एसआईटी से मिली क्लीन चिट का विरोध करने वाली इस याचिका के खारिज होने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी मुस्लिमों के बीच इस मामले को जोर-शोर से उठाएगी, ताकि पार्टी में अधिक से अधिक मुस्लिमों को जोड़ा जा सके।
उल्लेखनीय है कि मोदी के खिलाफ गुजरात दंगा केस में एसआईटी ने पिछले साल ही क्लीन चिट दी थी, लेकिन दंगों में मारे गए पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी कोर्ट चली गई और अब कोर्ट ने मोदी को बरी कर दिया।
बढ़ सकते हैं एनडीए के घटक दल
नरेंद्र मोदी को दी गई क्लीन चिट से एनडीए का कुनबा बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। नरेंद्र मोदी को सांप्रदायिक कहकर किनारा करने वाले कई राजनीतिक दल वापस एनडीए में आ सकते है।
चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन से जिस तरह नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बढ़ी है इसका फायदा लोकसभा चुनावों में पार्टी भुनाने को तैयार है। अब कोर्ट के फैसले से उसके प्रति क्षेत्रीय दलों नजरिया भी बदलेगा।
जदयू के अलग होने के बाद कमजोर हो चुके एनडीए के लिए आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी और चंद्र बाबू नायडू दोनों नरम पड़ सकते हैं। तमिलनाडु में जयललिता भी पुरानी दोस्ती के लिए मान सकती हैं तो डीएमके और अन्य छोटे दलों भी आसानी एनडीए में शामिल हो सकते हैं।