गुजरात विधानसभा के पहले चरण के चुनाव में रिकॉर्ड मतदान ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया। सौराष्ट्र, दक्षिण गुजरात तथा आसपास की 87 सीटों पर करीब 68 प्रतिशत मतदान हुआ। वर्ष 2007 में इन्हीं सीटों पर करीब 59 प्रतिशत मतदान हुआ था। रिकॉर्ड मतदान ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ही धड़कन बढ़ा दी है।
त्रिकोणीय मुकाबला होने के कारण ज्यादा मतदान को हर राजनीतिक दल अपने पक्ष में बता रहा है। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि अधिक मतदान बता रहा है कि भाजपा को बहुमत मिल रहा है। राजनीतिक विश्लेषक भी इस बारे में सही-सही आकलन नहीं कर पा रहे हैं।
सामने आ रहे हैं ये विचार
गुजरात के चुनावी इतिहास को देखते हुए एक वर्ग मान रहा है कि अधिक मतदान से भाजपा को फायदा होता है और पहले चरण का मतदान मुख्यमंत्री मोदी के पक्ष हित में है। कुछ का कहना है कि एंटी इंकम्बेंसी के कारण भी अधिक मतदान हो सकता है जो भाजपा के खिलाफ जा सकता है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल ने ज्यादातर वर्तमान विधायकों को ही टिकट दिए हैं।
खासकर सौराष्ट्र में त्रिकोणीय मुकाबले के कारण भी जनता का रुख खुलकर सामने नहीं आ पा रहा है। सौराष्ट्र में पटेल समुदाय का प्रभाव होने के कारण तीनों पार्टियों ने करीब सौ प्रत्याशी इसी समुदाय के खड़े किए। पटेल समुदाय से होने के कारण जीपीपी के केशुभाई का समाज पर प्रभाव है और वे सुरेंद्रनगर, राजकोट, जामनगर, पोरबंदर, अमरेली व भावनगर जिलों की 21 सीटों को प्रभावित कर रहे हैं। इन सीटों पर वह भाजपा और कांग्रेस दोनों को कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
पहले चरण पर एक नजर
पहले चरण के चुनाव में 846 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम मशीनों में बंद हो चुका है। इस चरण में भाजपा के 87, कांग्रेस के 84 तथा जीपीपी के 83 प्रत्याशी ने अपनी किस्मत आजमाई। साथ ही 383 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं। कुल 26 राजनीतिक पार्टियां मैदान में हैं।
इन सीटों में भाजपा ने दर्जन भर मंत्रियों सहित 40 मौजूदा विधायकों को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने पहले चरण में अपने 16 मौजूदा विधायकों और तीन सांसदों को चुनावी मैदान में उतारा है। जीपीपी प्रमुख केशुभाई पटेल ने वीसावदर सीट से अपनी दावेदारी पेश की है।