प्रेमी संग मिलकर अपने ही पिया का घर लुटवाने वाली लुटेरी दुल्हन साक्षी की पहली रात बदायूं जेल में करवटें बदलते हुए बीती। बाबुल के घर से पिया के घर तक ऐशोआराम की जिंदगी व्यतीत करने वाली साक्षी की पहली रात बदायूं जिला कारागार में बड़ी कसमकश भरी रही।
साक्षी ने रात को खाना भी नहीं खाया और ना किसी से बात की। बेटी कितनी भी गुनहगार सही, लेकिन माता पिता का दिल आखिरकार पसीज ही गया। उसके माता पिता ने गुरुवार को बदायूं जेल जाकर उससे मुलाकात की। उसके कृत्य पर उलाहने दिए, वहीं ढांढस भी बंधाया।
लुटेरी दुल्हन साक्षी को पुलिस ने दो जून को गिरफ्तार करके उसके प्रेमी समेत तीन को न्यायालय में पेश किया था, जहां से उसे बदायूं कारागार भेज दिया गया।
57 महिला कैदियों संग गुजारी रात
17 अप्रैल 2015 को शादी के लाल जोड़े में पिया के घर गवां पहुंची बरेली के आंवला के बर्तन व्यापारी प्रदीप अग्रवाल की बेटी साक्षी ने कुछ दिन तक तो अपने षड्यंत्र की जानकारी नहीं होने दी या फिर ससुराल वाले नई दुल्हन के स्वागत में इतना इतरा रहे थे कि उन्होंने उसके खूबसूरत चेहरे के पीछे छिपे शातिर दिमाग को भांप नहीं सके।
साक्षी ने 23 मई को अपने आंवला निवासी प्रेमी समर खान के साथ मिलकर अपने पिया राहुल अग्रवाल के घर को लुटवा दिया। तीन जून की रात उसकी जिंदगी की जेल में बीतने वाली पहली रात थी। बताते हैं जेल में पहला कदम रखते ही वह फफक पड़ी थी। साक्षी को ऐशोआराम भरी जिंदगी और जेल की मच्छरों से भनभनाती महिला बैरक में अंतर समझ में आया।
कभी कमरे में पति के साथ एकांत या फिर अन्य परिजनों के साथ होती थी लेकिन यहां 57 अन्य महिला कैदी साथ थीं। सोने के लिए स्थान भी काफी संकुचित था, इसलिए अधिकांश रात वह खड़ी रही।
माता-पिता का पसीजा दिल, जेल में आए मिलने
साक्षी जेल में पूरी रात चहल कदमी करती रही, कभी फफक फफक कर रोने लगती तो महिला कैदी समझा बुझाकर शांत कर देते। निर्धारित समय पर जेल प्रशासन ने खाना दिया तो खाना लिया तो सही लेकिन खा नहीं सकी। कुछ सोच कर बिलख पड़ती थी।
किसी तरह गुरुवार की सुबह हुई, लेकिन उसके सुर्ख आंखें बता रही थी कि वह रातभर सो नहीं सकी। गुरुवार को उस समय उसकी आंखें चमक उठी, जब उसे बताया गया कि उसके पिता प्रदीप अग्रवाल व उसकी मां मिलने आई हैं।
माता पिता को देखते ही वह फूट फूट कर रोने लगी। हालांकि माता-पिता ने आते ही उससे उसके कृत्य को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। लेकिन उसके आंसुओं की धारा में कुछ देर बाद ही उनका गुस्सा बह गया। कुछ देर बाद ही उसे ढांढस बंधाने लगे।
'साक्षी महिला बैरक में है, गुरुवार को निरीक्षण के दौरान उससे बातचीत की थी, उसने खुद को बीएससी की पढ़ाई किए हुए बताया था। हालांकि उससे कुछ अधिक बातचीत नहीं की, लेकिन काफी परेशान सी दिख रही थी। लगता है कि उसे अहसास है कि उसने कितना असामाजिक कृत्य किया है। यूं तो जब कोई पहली बार जेल आता है तो ऐसा होना स्वाभाविक ही है।'
--अरविंद पांडेय, कारागार अधीक्षक बदायूं