यूपीए के नीतिगत पंगुपन के दौर से देश को निकालकर विकास की पटरी पर वापस लाने के वादों पर सत्ता में आई मोदी सरकार के पहले बजट की आर्थिक पंडित चाहे जैसी व्याख्या करें मगर सियासी रूप से यह पूरी तरह चुनावी वादों का बजट है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली का बजटीय ऐलान वस्तुत: भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र का पहला एपिसोड है। बजट में घोषणा पत्र में किए गए अधिकांश वादों को न केवल जगह दी गई है बल्कि तमाम योजनाओं के नाम भी हूबहू पार्टी घोषणा पत्र के अनुरूप हैं। स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ...बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना कुछ ऐसे ही नाम हैं।
आम बजट में 100 स्मार्ट सिटी बनाने, गंगा की सफाई, हर राज्य को एम्स, युवाओं को रोजगार, मध्य वर्ग के साथ उभरते मध्य वर्ग को रोजगार और राह, मदरसों का आधुनिकीकरण, पूर्वोत्तर और कश्मीर के विकास के लिए किए गए कई प्रावधान और घोषणाओं को भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र के वादों में प्रमुखता से शामिल किया था।