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रेप पीड़िता का अब नहीं होगा टू फिंगर टेस्ट

Wed, 05 Mar 2014 08:25 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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मानसिक और शारीरिक आघात का सामना करने वाली रेप पीड़िता को अब मेडिकल जांच के नाम पर दुबारा अमानवीय दर्द नहीं झेलना होगा। केंद्र सरकार ने दो अंगुलियों के जरिए की जाने वाली रेप की जांच की लज्जाजनक प्रक्रिया को गैरकानूनी करार दिया है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को रेप की मेडिकल जांच के लिए नए दिशानिर्देशों को जारी करते हुए कहा है कि यदि डॉक्टर टू फिंगर टेस्ट के जरिए रेप की जांच करेगा तो उसे जेल की हवा खानी पड़ेगी। साथ ही रेप के मेडिकल टेस्ट से पहले एफआईआर दर्ज कराने की बाध्यता को भी समाप्त कर दिया गया है।

गृह मंत्रालय के नए नियमों में पीड़िता की जांच के लिए अस्पतालों में अलग कमरे की व्यवस्था और जांच के समय पुरुष डॉक्टर के साथ महिला डॉक्टर की मौजूदगी को अनिवार्य बनाया गया है। जांच के समय कोई भी तीसरा व्यक्ति कमरे में नहीं रहेगा।
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इन दिशानिर्देशों में चिकित्सकों से बलात्कार शब्द का इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है क्योंकि यह चिकित्सकीय नहीं अपितु कानूनी परिभाषा है। इससे पहले रेप पीड़िता की जांच सिर्फ पुलिस के कहने पर की जाती थी। लेकिन अब ऐसा आवश्यक नहीं है।

यदि पीड़िता पहले अस्पताल आती है तो प्राथमिकी के बिना भी चिकित्सकों को उसकी जांच करनी होगी। गौरतलब है कि रेप की जांच के लिए गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए दिशानिर्देशों को क्लीनिकल फॉरेंसिंक मेडिकल यूनिट (सीएफएमयू) के प्रभारी इंद्रजीत खांडेकर की अध्यक्षता में गठित समिति ने तैयार किया है।

इस समिति का गठन इंडियन काउंसिल ऑफ  मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. वीएम कटोच ने नवंबर 2011 में किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट दिसंबर 2013 को सौंप दी थी। जिसके बाद अब सरकार ने इन नए दिशानिर्देशों को जारी कर दिया है।
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