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मोदी सरकार का एक और यूटर्न, पढ़िए नया मामला

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मल्टीब्रांड रिटेल में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के विरोध में कई दिनों तक संसद की कार्यवाही बाधित करने वाली भाजपा अपने पुराने रुख से पलट गई है।
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भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई के पक्ष में आ गई है। मंगलवार देर शाम को डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) की तरफ से जारी प्रेस सर्कुलर में मल्टीब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई को जारी रखा है।

सात मार्च 2013 को तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने खुदरा कारोबारियों की तरफ से दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित सम्मेलन में कहा था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई की अधिसूचना को वापस ले लिया जाएगा।
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मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई के विरोध में सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, मुरली मनोहर जोशी सरीखे वरिष्ठ नेता संसद में अपनी आवाज बुलंद कर चुके हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई के विरोध में 14 सितंबर 2012 को ट्वीट किया था।

8 जून को होगी एक आपात बैठक

सर्कुलर में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की तरफ से मल्टीब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई की इजाजत को लेकर जो भी नियम व शर्तें तय की गई थीं, उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

यूपीए सरकार के कार्यकाल में मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि वह खुद को छला हुआ महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कंफेडरेशन ने सरकार के इस कदम को देखते हुए आगामी 8 जून को नागपुर में आपात बैठक बुलाई है। मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई की इजाजत देने व नहीं देने का मसला मुख्य रूप से राज्यों पर निर्भर करता है।

भाजपा शासित राज्य सरकारें मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई वाले रिटेल स्टोर को खोलने की इजाजत नहीं देने का फैसला कर चुकी हैं। दिल्ली, राजस्थान की सरकार मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई वाले स्टोर को खोलने की इजाजत नहीं देने का ऐलान कर चुकी हैं।
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दिल्ली सरकार लागू नहीं करेगी केंद्र का फैसला

दिल्ली सरकार खुदरा के मल्टीब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के प्रवेश को अनुमति नहीं देगी। केंद्र सरकार की तरफ से मंगलवार को जारी पॉलिसी डॉक्यूमेंट में मल्टीब्रांड रिटेल में यूपीए सरकार के फैसले 51 फीसदी एफडीआई के फैसले का दिल्ली सरकार समर्थन नहीं करेगी। दिल्ली सरकार का तर्क है कि केंद्र सरकार की पॉलिसी की वजह से कोई अस्पष्टता उत्पन्न न हो, इसलिए सरकार ने मामले में अपना रुख स्पष्ट किया है।

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि दिल्ली में हम खुदरा क्षेत्र में एफडीआई को लागू नहीं करेंगे। केंद्र सरकार ने पॉलिसी पास कर दी है तो कोई बात नहीं। दिल्ली सरकार ने केंद्र के इंडस्ट्रीज पॉलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) को 14 जनवरी, 2014 को इस मामले में अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। उसमें कोई बदलाव नहीं है।

सरकार खुदरा व्यापार के चरित्र को दिल्ली में परेशान करना नहीं चाहती। यह दृष्टिकोण सरकार का है। रिटेल में एफडीआई के प्रवेश से व्यापारी हितों को हानि हो सकती है और बेरोजगारी को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट किया है कि 2012 में शीला दीक्षित की कैबिनेट ने रिटेल में एफडीआई को मंजूरी का जो फैसला किया था, उसे जनवरी, 2014 में बदला जा चुका है।

उस फैसले में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली सरकार रिटेल में एफडीआई सिर्फ विरोध के लिए विरोध नहीं कर रही है। उन्होंने स्‍प्‍ाष्ट किया कि राजधानी के खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की जरूरत नहीं है।

हमारी सरकार रिटेल में एफडीआई सिर्फ विरोध के लिए विरोध नहीं कर रही है, बल्कि राजधानी के खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की जरूरत नहीं है।

-अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री
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