मांट तहसील के गांव जटपुरा में माता-पिता ने सपना देखा कि बच्चे आईआईटी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करें। इस सपने को साकार करने के लिए धीरे-धीरे पुरखों की जमीन बिकती चली गई पर इसकी तनिक परवाह नहीं की। आज सपना पूरा है, सगे भाई-बहन आईआईटी की कसौटी पर खरे उतरे हैं और दाखिला लेने की बारी आ गई है।
परिवार में अब थोड़ा-बहुत खेत बचा है और उसी के सहारे भोजन की व्यवस्था होती है। इस संकट को सीएम अखिलेश ने समझा है। उन्होंने आठ जुलाई के परिवार को मिलने के लिए बुलाया है। पत्नी के पैर में चोट से आर्थिक झंझावतों में घिरे कालीचरन बच्चों को देश के नामी संस्थान से इंजीनियरिंग कराना चाहते थे लेकिन आर्थिक दिक्कतें आड़े आने लगीं।
बड़ी बेटी विनीता और बेटे सुधीर का भी निश्चय था कि वो इंजीनियरिंग की पढ़ाई जरूर पढ़ेंगे। पिता ने अपने सपने और बच्चों के अरमानों की खातिर जमीन बेचने का कठोर निर्णय लिया। पढ़ाई के सिलसिले में किसान कालीचरन ने तीन साल में अपनी सारी जमीन बेच दी। कर्ज लिया और अपने भाई से रकम लेकर बच्चों को पढ़ाया। गरीबी में पले बेटा और बेटी की प्रतिभा आखिर रंग लाई।