बुंदेलखंड में सूखे से फसल बर्बाद होने और कर्ज से तंग आकर तीन किसानों ने जान दे दी। इनमें एक किसान ने झांसी जिले में ट्रेन के आगे कूदकर जबकि बांदा में जहर खाकर और महोबा में फांसी लगाकर एक-एक किसान ने आत्महत्या कर ली। इससे पहले 27 किसानों की फसल बर्बादी और कर्ज के कारण मौत हो चुकी हैं।
झांसी जनपद के चिरगांव थानांतर्गत गांव नंदखास के पास रेलवे ट्रैक पर गांव सिया निवासी मुलायम सिंह यादव (55) पुत्र बैजनाथ ने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी। उसके परिजनों ने पोस्टमार्टम हाउस पर बताया कि मुलायम सिंह खेती बाड़ी करके परिवार का भरण पोषण कर रहा था। उसने किसान क्रेडिट कार्ड पर दो लाख रुपये का ऋण ले रखा था।
ट्रैक्टर भी ऋण पर लिया गया था। उसे उम्मीद थी कि अच्छी फसल होने पर वह अपना ऋण चुकता कर देगा। मगर रबी के बाद अब खरीफ की भी फसल नष्ट होने से उसकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। ऋण और उसपर तेजी से ब्याज बढ़ने से वह काफी परेशान रहने लगा। इसके चलते बृहस्पतिवार की शाम को वह अपने घर से खेत पर काम करने की कहकर निकला और देर तक नहीं लौटा।
शुक्रवार की सुबह परिजनों को सूचना मिली कि रेलवे ट्रैक पर एक शव पड़ा मिला है, जिसको जाकर देखने पर उन्होंने मुलायम सिंह की नंदखास से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर शिनाख्त की। परिजनों ने पुलिस को बताया कि फसल बर्बाद होने के बाद वह अपने पर कर्ज को लेकर काफी दुखी था। इसी वजह से उसने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या की है। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव उसके पुत्र ग्राम सिया निवासी पृथ्वी सिंह यादव को सौंप दिया है।