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सपा का नेता भी रह चुका है गजेंद्र, जानिए गजेंद्र के बारे में सबकुछ

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दौसा जिले के नांगलझापरवाड़ा निवासी चालीस वर्षीय गजेंद्र सिंह के घर शादी का माहौल था, जो अचानक मातम में बदल गया। हालांकि पड़ोसी के घर शादी थी, लेकिन आयोजन के लिए गजेंद्र के परिजनों ने अपना परिसर दे दिया था।
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घर में सुबह से हंसी-ठहाके से माहौल खुशनुमा बना हुआ था, जैसे ही समाचार चैनलों के जरिए गजेन्द्र सिंह के दिल्ली में आप की रैली में फंदा लगाने की सूचना मिली, घर पर एकाएक सन्नाटा छा गया। फिर परिजनों के विलाप की आवाजें वातावरण में गूंजने लगी।

गजेन्द्र के गांव में बेमौसम बारिश की ऐसी मार के कारण सभी किसानों को नुकसान हुआ है। सरकार से किसी भी किसान को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है।

कौन हैं गजेन्द्र सिंह?

ग्रामीणों के अनुसार गजेन्द्र सिंह के परिवार को एक सम्पन्न परिवार के रूप में माना जाता है। गजेन्द्र सिंह के चाचा गोपाल सिंह सरपंच हैं और इससे पहले लगातार तीन बार गजेन्द्र सिंह की चाची सरपंच रही थी।

गजेन्द्र सिंह सपा की राजनीति करता रहा था। गजेन्द्र सिंह वर्ष 2007-08 में सपा से जिला अध्यक्ष रहा है। इस दौरान उसने बांदीकुई विधानसभा सीट से सपा से टिकट भी मांगा था, लेकिन उसे टिकट नहीं मिला था।

मुआवजा से बाहर है तहसील
सरकार के खराबे के नियमानुसार पूरी बसवा तहसील को मुआवजे से बाहर रखा गया है। यहां खराबा 22 फीसदी ही दर्ज किया गया, जबकि सरकारी नियम 33 फीसदी तक खराबे पर मुआवजा देने का है।

'ऐसे कदम की नहीं थी उम्मीद'

गजेन्द्र सिंह नुकसान से आहत जरूर था। उसका परिवार 50 बीघा खेत पर आश्रित है। तीन भाई होने के कारण खुद के हिस्से 17 बीघा जमीन आती है। गजेन्द्र सिंह ने खेत में आंवले का बाग, गेहूं और सरसों की फसल लगाई हुई थी।

फंदा लगाने की सूचना के बाद गजेन्द्र के चाचा सरपंच गोपाल सिंह दिल्ली रवाना हुए। उन्होंने बताया कि फसलें खराब होने के बाद से ही गजेन्द्र काफी परेशान था और भविष्य की आशंकाओं से घिरा रहता था।

वो बोलता था कि मेहनत खराब हो गई और नुकसान की भरपाई कैसे होगी? पिछले दस दिनों से गजेन्द्र विचलित था। फिर दिल्ली जाने की कहकर रवाना हुआ और इसके बाद ऐसी सूचना मिली, जिस पर पहले किसी को भी विश्वास नहीं हुआ।

पगड़ी बांधने में जीती प्रतियोगिताएं

गजेन्द्र सिंह हमेशा पगड़ी बांधे रहता था। चाचा ने बताया कि गजेन्द्र जैसलमेर सहित विभिन्न जगहों पर आयोजित होने वाले मेलों में पगड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लेता और कई बार जीतता।

वह खुद की और दूसरों के सिरों पर पगड़ी बांधने में निपुण था। फंदा लगाते समय भी उसने पगड़ी बांधी हुई थी।

गजेन्द्र अपनी पत्नी और तीन बच्चों को छोड़कर चला गया। सबसे बड़ी बेटी 18 साल की है और 12वीं कक्षा की छात्रा है।
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पायलट ने किया सहायता राशि का ऐलान

राजस्थान के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने गजेन्द्र सिंह के परिजनों को दो लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है। वहीं, राजस्थान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गजेंद्र सिंह के खुशकुशी करने पर गहरा दुख जताया है।

राजे ने कहा कि किसान की मौत पर मंत्रियों से पूरी जानकारी मांगी गई है। केंद्रीय मंत्री सांवरलाल जाट को गजेंद्र के घर भेजा है। उन्होंने अपील की कि आम आदमी पार्टी के नेताओं को राजनीति नहीं करनी चाहिए, बल्कि किसान की जान बचानी चाहिए।

अकेला न समझें मेहनतकश किसान: मोदी
आप की रैली में राजस्थान के किसान की आत्महत्या मामले में सियासी बवंडर खड़ा हो गया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने किसान की आत्महत्या पर गहरा दुख जताया है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि गजेंद्र नाम के किसान की आत्महत्या ने पूरे देश को हिला दिया है। वह खुद भी इस घटना से आहत हैं। मेहनतकश किसानों को संकट की इस घड़ी में खुद को अकेला नहीं समझना चाहिए। हम सभी मिलकर किसानों के अच्छे भविष्य के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। मोदी ने गजेंद्र के परिवार वालों से संवेदना व्यक्त की है।
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